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Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक ने ख़त्म किया अनशन परन्तु छात्रों का आंदोलन जारी

  • सी जे पी शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफा होने तक जारी रखेगा आंदोलन

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रिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी / नई दिल्ली, 24 जुलाई:
Sonam Wangchuk: नींट पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर मंतर पर, हज़ारों की संख्या में आंदोलन रत, छात्रों के समर्थन में अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्त्ता और पर्यावरण विद सोनम वांगचुक ने 26 दिनों के बाद अपना अनशन ख़त्म कर दिया. बीती देर रात सरकार के लिखित आश्वासन के साथ केंद्रीय मंत्रियो जे पी नड्ढा और डॉ जीतेन्द्र सिंह ने, नई दिल्ली के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती सोनम वांगचुक को जूस पिलाकर, उनका अनिश्चित कालीन अनशन ख़त्म कराया. दूसरी ओर सरकार के आश्वासन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा या हटाये जाने की कोई चर्चा नहीं होने से, सी जे पी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफा होने तक आंदोलन को जारी रखने का ऐलान कर दिया है.

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छात्रों के बढ़ते आक्रोश और देश के विभिन्न राज्यों में भी छात्र आंदोलन के बढ़ते विस्तार ने, केंद्र सरकार को कुम्भ कर्णी नींद से जगाया. आंदोलन के लगभग एक महीने बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुप्पी तोड़ी. इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार आधी रात को, जेन जी की भाषा में अपनी बातों को, स्वयं अपनी मोबाइल से रिकॉर्ड किया और इंस्टाग्राम पर उपलोड कर दिया. अपने पोस्ट के प्रारम्भ में मित्रों के सम्बोधन की जगह पहली बार फ्रैंड्स शब्द का इस्तेमाल कर, उन्होंने डिजिटल युग के विलक्षण प्रतिभा के धनी, युवा पीढ़ी के गुस्से को शांत करने का भरसक प्रयास किया.

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आधी रात को अपने मोबाइल से इंटरनेट मीडिया पर जारी अपने बयान में उन्होंने छात्रों और युवाओं को आश्वस्त किया है कि, सरकार उनके भविष्य के प्रति चिंतित है. हर संभव कदम उठाकर भविष्य में पेपर लीक को रोकेगी. फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर दोषियों को कड़ी सजा दी जायेगी. मृत छात्रों के परिवारों को मुआवजा दी जायेगी. आंदोलनरत किसी भी छात्र पर मुकदमा भी नहीं दर्ज होगा. लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के सवाल पर वे मौन रहे।.

यहाँ पर एक बात गौर करने वाली है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 सालो के कार्यकाल में पहली बार देखने को मिला कि, जो सरकार अपने पिछले कार्यकालों के दौरान, एक साल तक चले लम्बे किसान आंदोलन, उसके बाद सी ए ए और महिला पहलवानो के लम्बे समय तक चले एवं अनेकों आंदोलनों के आगे नहीं झुकी, वह सरकार छात्रों युवाओं के जोश और जूनून के आगे मात्र एक महीने में कैसे झुक गई…..? क्या सरकार को भविष्य में देशव्यापी भयंकर छात्र आंदोलन की सुगबुगाहट मिलने लगी थी…. क्या जय प्रकाश नारायण का छात्र आंदोलन दोहराने जा रहा है……इस यक्ष्य प्रश्न का जवाब आना अभी बाकी है.