Gujarat politics: गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन के मायने: डॉ शिरीष काशीकर

वैसे तो जिस प्रकार से “हाईकमांड” ने दिल्ली से चक्कर चलाया और एक ही कंकड़ में कुछ पंछी मार दिए तो कुछ को घायल कर दिया। शांत स्वभाव के और … Read More

world mental health day: मानसिक स्वास्थ्य और सांस्कृतिक परिवर्तनः गिरीश्वर मिश्र

world mental health day: आदमी ही सक्रिय हो कर उत्पादक कार्यों को पूरा करते हुए न केवल अपने लक्ष्यों की पूर्ति कर पाता है बल्कि समाज और देश की उन्नति … Read More

Gandhi Jayanti: राष्ट्रपिता का भारत–बिम्ब और नैतिकता का व्यावहारिक आग्रह: गिरीश्वर मिश्र

स्मरणीय है अमेरिकी चिंतन ने यूरोप से अलग दृष्टि स्वीकार की और रूस ने भी स्वायत्त चिंतन की दृष्टि विकसित की. औपनिवेशिक भारत के लिए आत्मान्वेषण की राह बड़ी विकट … Read More

freedom has no value: स्वतंत्रता का कोई मोल नहीं: गिरीश्वर मिश्र

भारत की राष्ट्रीय चेतना को लेकर अक्सर यह विचार सुनने में आता है कि इसका विकास अंग्रेजों द्वारा भारत में लाई गई अंग्रेजी शिक्षा की देन है. यह कहते हुए … Read More

Hindi Cinema: हिंदी सिनेमा में भाषा संस्कार का अनुशासन होना चाहिए : प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल

हिंदी सिनेमा (Hindi Cinema) में प्रदर्शित सामाजिक संघर्ष देश और दुनिया के दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है: प्रदीप कुमार मैत्र वर्धा, 14 सितंबर: Hindi Cinema: महात्‍मा गांधी … Read More

Hindi Diwas: भाषाई स्वराज और भारतीय अस्मिता: गिरीश्वर मिश्र

Hindi Diwas: हिन्दी दिवस-१४ सितम्बर भारत की आत्मा भारत की भाषाओं में बसती है. भारतीय चिंतन की निरंतरता तिरुवल्लूर, नामदेव, शंकरदेव, तुलसीदास सबमें मिलती है. कहते हैं कि जब अंग्रेज … Read More

Webinar: आनंद कें. कुमारस्‍वामी ने स्‍वराज के यत्‍न को चिन्‍मय बनाया : प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल

वर्धा, 10 सितंबर: Webinar: महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने कहा कि भारतीय कला के अनन्‍य आराधक आनंद केंटिश कुमारस्‍वामी ने स्‍वराज के यत्‍न … Read More

Bharatendu 171st birth anniversary: स्वराज का लक्ष्य स्वभाषा से ही प्राप्त हो सकता है : प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल

वर्धा, 10 सितम्बर: Bharatendu 171st birth anniversary: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा है कि स्वराज का लक्ष्य स्वभाषा से ही प्राप्त हो … Read More

Teachers day: शिक्षक होने की चुनौती: गिरीश्वर मिश्र

इस तरह शिक्षा- कार्य की परिधि का निर्धारण गुरु जनों के विवेक द्वारा होता था जिन्हें परम्परा और समकालीन परिस्थिति दोनों का ज्ञान होता था . वे शिक्षा देते हुए … Read More

संस्कृत है जीवन-संजीवनी !

यानी भाषा मूर्त और अमूर्त के भेद को पाटती है और हमारे अस्तित्व को विस्तृत करती है. आँख की तरह भाषा हमें एक नया जगत दृश्यमान उपलब्ध कराती है. इसके … Read More

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