The mind: शरीर की उम्र बरसो में मापते है, पर मन का भी क्या कोई पैमाना होता है: डॉ दिलीप बच्चानी

~~गजल~~ शरीर की उम्र बरसो में मापते है परमन का भी क्या कोई पैमाना होता है। ये जिस तजुर्बे की बात करते है लोगवो दिमाग है जो काफ़ी सयाना होता … Read More

निभाता है कौन….

ग़ज़ल मेरी आवाज़ से आवाज़ मिलाता है कौनप्यार के गीत सरे-बज़्म सुनाता है कौन एक मुद्दत हुई है,मैंने भुलाया था उसेफिर मेरे ख़्वाबों में चुपके से ये आता है कौन … Read More

जो थकता है थककर के चूर होता है, अपने कमाए हर निवाले पर उसे गुरुर होता है

श्रम पर्व पर विशेष रूप से ये गजल जो थकता है थककर के चूर होता हैअपने कमाए हर निवाले पर उसे गुरुर होता है जी तोड़ मेहनत कर जो अपना … Read More

काश कोई तो पूछ ले “क़ादिर”(Kadir) आँखों से दरया बहता क्यों है

ग़ज़ल~ धोका क्यों है हर मंज़िल पर धोका क्यों हैमौसम बदला-बदला क्यों है महँगे-महँगे सारे खिलौनेमेरा दिल फिर सस्ता क्यों है रिश्ते सारे तोड़ चुका जोख़्वाब में चुपके आता क्यों … Read More

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