Wajid Husain

Wajid Hussain Sahil: बेसबब हमने लुटाया भी बहुत होता है: वाजिद हुसैन “साहिल”

Wajid Hussain Sahil: नज़्म…….उनका साया रहे……..

Wajid Hussain Sahil: बेसबब हमने लुटाया भी बहुत होता है
मुफ्त का माल है, ज़ाया भी बहुत होता है

ये शजर जिनको मयस्सर नहीं उनसे पूछो
बाप का फल नहीं साया भी बहुत होता है

बाप जैसे मोहब्बत की ठंडी हवा
बाप जैसे हो मक़बूल कोई दुआ
बाप इक पेड़ है, जैसे कोई घना
उनका साया रहे मेरे सर पर सदा

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उनके होने से आसां हुई ज़िंदगी
जैसे तारीकियों में मिले रोशनी
आ रही मेरे दिल से यही इक दुआ
उनका साया रहे मेरे सर पर सदा

ग़म क्या होते है, मैं जानता ही नहीं
और मुसीबत को पहचानता ही नहीं
उनके चेहरे से मिलता है जब हौसला
उनका साया रहे मेरे सर पर सदा

रास्ते में कभी जो भटकने न दे
सख़्त राहों में सर को पटकने न दे
हर क़दम पर दिखाते है जो रास्ता
उनका साया रहे मेरे सर पर सदा

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उनको सेहत मिले और ताक़त मिले
उनके लब पर सदा मुस्कुराहट मिले
बस यहीं इल्तेजा तुझसे है ऐ खुदा!
उनका साया रहे मेरे सर पर सदा

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