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Ek safar part-3: एक सफर एहसासों का

Ek safar part-3: एक सफर एहसासों का (भाग-3)

Rajesh rajawat

Ek safar part-3: आखिर अब क्या होता है रिशू और अनुम के उस झगड़े के बाद
( दोस्तों फिर से स्वागत है आपका एक सफर एहसासों का Part-3 में )

रिशू और अनुम के झगड़े के बाद
दोनो ही एक दूसरे से जुदा हो जाते है
उधर अनुम के मन में
ना जाने कैसे कैसे खयाल आ रहे थे
और इधर रिशू भी
धीरे-धीरे पत्थर दिल होता जा रहा था
रिशू का गुस्सा अनुम पर जायज था
क्योंकि रिशू उसके लिए बहुत कुछ
महसूस करने लगा था
कम शब्दों में कहा जाए तो रिशू को
अनुम से बे-इंतहां प्यार हो गया था
बस कुछ ऐसी ही उलझने थी जिसके
वजह से आजकल रिशू उदास रहने लगा था
और फिर आखिर में रिशू ने फैसला कर ही
लिया कि अब वो मोहब्बत नहीं करेगा

उधर अनुम अपने दोस्तों के साथ
बहुत खुश थी ऐसे में ही धीरे-धीरे
रिशू उसके खयालों से भी
बहुत दूर चला गया
मगर फिर भी कोई खालिश सी थी
जो अनुम को
अंदर ही अंदर खा जा रही थी
देखते-देखते जुदाई के दिन
हफ्ते और फिर महीनों में बदल गए
मगर अनुम जब भी उदास होती
उसे रिशू की बहुत याद आती
रिशू हर कदम पर
उसकी हिम्मत बनकर खड़ा था
रिशू के जाने के बाद अनुम खुद को
बहुत अकेला महसूस करने लगी थी
इस बात की खबर तो अनुम को भी
नही थी कि उसे
रिशू से कितना प्यार हो गया था

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और फिर एक दिन महीनों बाद
दोनो एक अनजान मोड़ पर टकरा जाते हैं
रिशू ने खुद को बदल लिया था
कि जब अनुम को कोई फर्क नहीं पढ़ता
तो वो भी अपने जज़्बात बढ़ने नही देगा
लेकिन कहते है ना
दिल पर भी किसका जोर चलता है
और बही साबित हुआ अनुम ने
रिशू की ओर एक कदम बढ़ाया
तो रिशू अनुम की ओर दो कदम बढ़ा
अनुम रिशू को अपने करीब पाकर
खुद को महफूज महसूस कर रही थी
अनुम सिसकते लफ्जों में कहने लगी
मुझे उस दिन ऐसा नहीं करना चाहिए था
रिशू मुस्कुराया और बोला कोई बात नहीं
उस दिन मेरा गुस्सा भी सरे आसमान पर था
दोनो एक दूसरे के सामने आते ही
सारी शिकायतें भूल गए

धीरे-धीरे पहले की तरह
फिर दोनो ही रोज मिलने लगे
रिशू उसकी खुशी का खयाल रखने लगा
और अनुम जरा भी देर ना करते हुए
वक्त पर आने लगी
रिशू ने अपने जज़्बात दबा कर रखे थे
और अनुम धीरे धीरे सारा हाल-ए-दिल
बयां करने लगी ,अनुम को लगा
जैसे उसे उसकी दुनियां मिल गई हो
और एक दिन अनुम लगे लगकर
कहने लगी मुझे अपने से दूर मत करना
रिशू उसे दिलासा देते हुए कहता
मैं तुम्हारे साथ नही तुम्हारे आगे खड़ा हूं
मेरे होते हुए दुख तुम्हे छू भी नहीं सकते
और एक दिन चांद तारों की छांव में
अनुम रिशू के लिए समर्पित हो गई
रिशू दिल का अच्छा लड़का था
उसे अनुम से मोहब्बत थी उसने प्यार से
अनुम के माथे को चूमकर अनुम के
सारे जज़्बात रोक दिए रात यूं ही
आंखों आंखों,बातों बातों में गुजर गई
और आखिर में इतनी उलझनों के बाद
सच्चे प्रेम की जीत हुई
अनुम को रिशू ,रिशू को अनुम मिल गई ।

Happy Ending 🥰

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Note-कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है किसी भी वास्तविकता से इसका कोई संबंध नहीं

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