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Kalamanthan Ganga: कलामंथन ‘गंगा’ ने समूह के मंतव्य को गति देते हुए काव्य-गोष्ठी का किया आयोजन

Kalamanthan Ganga: 2018 में स्थापित ,साहित्यिक मंच ‘कलामंथन’ ने अपने आकार में वृद्धि करते हुए पाँच नए क्षेत्रों का निर्माण किया, जो पाँच विभिन्न नदियों पर आधारित हैं।

नई दिल्‍ली, 03 सितम्बर: Kalamanthan Ganga: इस गूगल मीट काव्य समारोह में लगभग 23 कलमकारों ने अपनी 42 से भी अधिक बेहतरीन कविताओं का पाठ किया, जिसको 40 से अधिक श्रोताओं ने सुना। 2 घंटे 40 मिनट चलने वाली इस काव्य गोष्ठी का आगाज़ अर्चना मेहरा की भावपूर्ण प्रार्थना से हुआ और अंत स्वाति जी ने श्रोताओं के मध्य से आकर अपनी बेहतरीन कविता पढ़कर किया।

इसके अलावा काव्य गोष्ठी में अर्चना मेहता, अलका निगम, प्राची कौशल, दीपाली सिंह, डॉ.इंदु सिंह, रश्मि कुलश्रेष्ठ, प्रियंका गहलौत, सुरभि सिंह, रूचि मित्तल, अमिताभ शर्मा, कविता गुप्ता, मौसमी आर्य, मीतू वर्मा, प्रियंका चौहान, रेखा चोपड़ा, ऋतु सिसोदिया, रोली श्रीवास्तव, समिधा वर्मा, संध्या गुप्ता, पल्लवी राज, ज्योत्स्ना, और स्वाति जी ने अपनी बेहतरीन रचनाओं के साथ शिरक़त की।

Kalamanthan Ganga

Kalamanthan Ganga: ख़ूबसूरत रचनाओं के बीच में से कुछ रचनाओं ने दिलों में ख़ास जग़ह बनाई। जिनमें से अलका जी ‘यशोधरा’, अमिताभ जी की ग़ज़ल, अलका जी की ‘तासीर तेरे इश्क़ की’, इंदु सिंह जी की ‘सजीव हो मोबाइल तो क्या हो’, प्रियंका गहलौत की ‘मुझे रात होना है’,प्रमुख रहीं। रेखा जी की ‘हाँ,बदल रही हूँ मैं’, समिधा जी की ‘हाँ, मैं पुरुष हूँ’ समाज के दो पहलूओं पर थीं। रश्मि जी के प्रेम गीत ‘मन से मन के तार जुड़े तो’ पर सभी श्रोतागण झूम उठे।

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कार्यक्रम की संकल्पना मंच की संस्थापिका सरिता निर्झरा जी और कम्युनिटी मैनेजर अंशु श्रीवास्तव जी का था। कार्यक्रम का संचालन ज्योत्स्ना जी और पल्लवी राज जी ने किया।

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