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MANAS National Narcotics Helpline: ‘मानस’ बना नशे के खिलाफ डिजिटल कवच

  • MANAS National Narcotics Helpline: राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन—‘नशा मुक्त भारत’ के लिए नागरिकों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल

­मानसएक ऐसी व्यवस्था जो नागरिकों के हाथों में अतिरिक्‍त शक्ति सौंपती है

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अहमदाबाद, 02 जुलाई: MANAS National Narcotics Helpline; सरकार ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और मादक पदार्थों की तस्करी की प्रमुख सामाजिक एवं जन-स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के रूप में पहचान की है। यह समस्या केवल किसी व्यक्ति तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवारों, समुदायों और सार्वजनिक सुरक्षा पर भी व्यापक प्रभाव डालती हैं। नागरिकों की मजबूत भागीदारी और सहायता सेवाओं तक उनकी आसान पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने एक ऐसे सुलभ एवं गोपनीय मंच की आवश्यकता महसूस की, जहाँ लोग नशीले पदार्थों से संबंधित गतिविधियों की सूचना दे सकें और आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकें।

इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए गृह मंत्रालय के अंतर्गत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (डीआईसी) (MANAS National Narcotics Helpline) के सहयोग से 18 जुलाई, 2024 को राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन ‘मानस’ (मादक पदार्थ निषेध आसूचना केन्‍द्र) का शुभारंभ किया गया। सुरक्षित और प्रौद्योगिकी-संचालित इस मंच के माध्यम से नागरिक नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियों की गोपनीय सूचना दे सकते हैं, परामर्श ले सकते हैं तथा किसी भी समय पुनर्वास संबंधी सहायता तक पहुँच सकते हैं।

मानस डिजिटल इंडिया (MANAS National Narcotics Helpline) की परिकल्पना और नशा मुक्त भारत के मिशन को एक मंच पर लाया है। इस प्लेटफॉर्म तक राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1933आधिकारिक वेब पोर्टलई-मेल तथा उमंग ऐप के जरिये पहुंचा जा सकता है। इन प्‍लेटफॉर्मों के जरिए सहायता उपलब्ध कराकर मानस नागरिकों को केवल मूक दर्शक बने रहने के बजाय नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और तस्करी के विरुद्ध अभियान में सक्रिय भागीदारी करने के लिए सशक्त बनाता है।

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क्‍या आप जानते हैं?भारत में (MANAS National Narcotics Helpline) मादक पदार्थों के दुरुपयोग की व्यापकता (2019) पर देश की पहली व्यापक रिपोर्ट ने नशे की समस्या के वास्तविक स्वरूप को उजागर किया।लगभग 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं, जिनमें से 5.7 करोड़ से अधिक लोग गंभीर रूप से प्रभावित हैं।3.1 करोड़ लोग भांग का सेवन करते हैं, 2.26 करोड़ लोग ओपिओइड (अफीम वर्ग के मादक पदार्थ) का उपयोग करते हैं और लगभग 1.18 करोड़ लोग दर्द दूर करने वाली दवाओं (सेडेटिव) का सेवन करते हैं।
MANAS National Narcotics Helpline

मानस क्या सुविधाएँ प्रदान करता है

मानस (MANAS National Narcotics Helpline) को नागरिकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यह एक ही मंच सूचना दर्ज कराने, परामर्श (काउंसलिंग) प्राप्त करने और जन-जागरूकता बढ़ाने जैसी सुविधाएं देता है।

MANAS National Narcotics Helpline
  • नागरिक अपनी पहचान गोपनीय रखकर मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध बिक्री, अवैध खेती तथा इससे संबंधित अन्य गतिविधियों की जानकारी दे सकते हैं।
  • नशे की लत से प्रभावित व्यक्ति परामर्श और सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उनकी कॉल सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की हेल्पलाइन 14446 पर स्थानांतरित कर दी जाती है।
  • हेल्पलाइन नम्‍बर 1933, वेब पोर्टल और उमंग ऐप के माध्यम से ये सेवाएँ किसी भी समय उपलब्ध हैं, जिससे देशभर के नागरिकों तक इनकी पहुँच सुनिश्चित होती है।
  • डिजिटल टिकट जनरेशन और वर्कफ़्लो प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से संबंधित एजेंसियों के साथ सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान संभव होता है, जिससे समन्वय और कार्रवाई की गति में सुधार होता है।
  • सेवाओं को अधिक समावेशी और व्यापक बनाने के लिए बहुभाषी कॉल सहायता, स्मार्ट आईवीआरएस, चैटबॉट एकीकरण तथा क्षेत्रीय भाषाओं में सहायता जैसी सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं।
मैं नशे की लत से पीड़ित व्यक्ति की कैसे मदद कर सकता/सकती हूँ?नशे की लत से ग्रस्त व्यक्ति मादक पदार्थों की आपूर्ति और मांग के दुष्चक्र का शिकार होता है। इसलिए उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए और उसे निकटतम सरकारी नशामुक्ति केन्‍द्र में पेशेवर एवं चिकित्सकीय सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। साथ ही, उसे परामर्श और थेरेपी प्राप्त करने के लिए भी प्रेरित किया जाए।

प्रभाव: निरंतर बढ़ता जन विश्वास

MANAS National Narcotics Helpline

शुरुआत से ही मानस ने नागरिकों तक अपनी पहुँच बढ़ाई है, सार्वजनिक सेवा वितरण को मजबूत बनाया है तथा मादक पदार्थों से जुड़ी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर किया है।

 इस मंच ने नागरिकों को सुरक्षित चैनलों के जरिये नशीले पदार्थों से संबंधित गतिविधियों की जानकारी देना अधिक सरल बनाया है। साथ ही, इसने नागरिकों और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सूचना का आदान-प्रदान मजबूत किया है, जिससे मादक पदार्थों की तस्करी और नशे के दुरुपयोग के विरुद्ध कार्रवाई एवं प्रतिक्रिया तंत्र अधिक प्रभावी हुआ है।

इसने देशभर में परामर्श (काउंसलिंग)पुनर्वास (रीहैबिलिटेशन) तथा जन-जागरूकता सेवाओं तक लोगों की पहुँच बेहतर बनाई है। पेशेवर परामर्श सेवाओं के बढ़ते उपयोग से यह स्पष्ट होता है कि नशे से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नागरिक अब अधिक संख्या में आगे आकर सहायता लेने के इच्छुक हैं। ऑनलाइन माध्यमों से चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों ने आम जनता, विशेषकर युवाओं, की नशा-विरोधी अभियानों में भागीदारी को बढ़ावा दिया है। प्लेटफॉर्म की पूर्णतः डिजिटाइज्ड कार्यप्रणाली ने विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय तथा सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाया है। साथ ही, यह प्रौद्योगिकी-संचालित नागरिक सहभागिता के माध्यम से नशा मुक्त भारत’ के व्यापक लक्ष्य को साकार करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

मानस: ‘डिजिटल इंडिया’ के संकल्प को सशक्त बनाती जन सेवा

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मानस इस बात का एक प्रभावी उदाहरण है कि प्रौद्योगिकी का उपयोग नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सार्वजनिक सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए किस प्रकार किया जा सकता है। यह डिजिटल इंडिया मिशन की परिकल्पना को निम्नलिखित व्यावहारिक और प्रभावी तरीकों से आगे बढ़ाता है:

  • मानस चौबीस घंटे कार्य करता है, भारत के किसी भी हिस्से से इसकी सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है।
  • यह जन-जागरूकता को ठोस और उपयोगी जानकारी में बदलता है, जिससे लोग केवल सरकारी सेवाओं के लाभार्थी नहीं रहते, बल्कि शासन व्यवस्था में सक्रिय भागीदार बन जाते हैं।
  • प्रत्येक सूचना को डिजिटल कार्यप्रणाली के माध्यम से दर्ज, पंजीकृत, ट्रैक और निपटाया जा सकता है, जिससे तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
  • यह मंच नागरिकों को सीधे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबीकी 30 क्षेत्रीय इकाइयों तथा 36 राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) से जोड़ता है।  
  • पोर्टल को एकीकृत, सुरक्षित और द्विभाषी मंच के रूप में विकसित किया गया है।
  • देशभर के किशोरों और युवाओं को नशा-विरोधी अभियान से जोड़ने के लिए MyGov पोर्टल के माध्यम से क्विज़, पोस्टर प्रतियोगिता और रील निर्माण प्रतियोगिता जैसे जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं।
  • चूँकि सभी सूचनाएँ डिजिटल रूप में संग्रहीत की जाती हैं, इसलिए उनके आधार पर रुझान और पैटर्न का विश्लेषण किया जा सकता है। इससे संबंधित एजेंसियों को यह समझने में मदद मिलती है कि किन क्षेत्रों में समस्या बढ़ रही है और उसके अनुसार प्रभावी रणनीति एवं कार्रवाई की योजना बनाई जा सकती है।

नशा मुक्‍त भारत की ओर

मानस यह दर्शाता है कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) का उपयोग नागरिक सुरक्षा और सामाजिक कल्याण के लिए किस प्रकार प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। यह मंच टेक्‍नोलॉजी, नागरिक भागीदारी, परामर्श, डेटा विश्लेषण और सुरक्षित रिपोर्टिंग को एक साथ जोड़कर एक सुरक्षित, स्वस्थ और नशा-मुक्त भारत के निर्माण में योगदान दे रहा है—एक समय पर एक रिपोर्ट और एक कॉल के माध्यम से। जैसे-जैसे इसकी पहुँच बढ़ रही है और इसके उपकरण अधिक उन्नत हो रहे हैं, मानस सुशासन का एक ऐसा उदाहरण बनकर उभर रहा है जो डिजिटल भी है और मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा हुआ है।