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BPCL Ethanol Case: इथेनॉल आवंटन विवाद पर सरकार का जवाब

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अहमदाबाद, 01 जुलाई: BPCL Ethanol Case: भारत के महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) के कार्यालय का ध्यान 30 जून 2026 को छपी कुछ मीडिया रिपोर्टों पर गया है। इन रिपोर्टों में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष महान्यायवादी द्वारा दी गई दलीलों को गलत तरीके से बताया गया है। ये दलीलें इथेनॉल आवंटन मामले में तेल विपणन कंपनियों (बीपीसीएल) द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका से जुड़ी कार्यवाही के दौरान दी गई थीं।

रिपोर्टों में कहा गया है कि सरकार का 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) कार्यक्रम “अभी भी एक चल रहा प्रयोग” है और “इस नीति का असर अगले वर्ष तक और स्पष्ट हो जाएगा।” ये रिपोर्ट पूरी तरह से गलत हैं और माननीय न्यायालय के समक्ष पेश की गई असल दलीलों से इनका कोई लेना-देना नहीं है।

सुनवाई के दौरान, महान्यायवादी ने बताया कि समर्पित इथेनॉल संयंत्रों को इथेनॉल के आवंटन से जुड़े समान मुद्दों वाली ऐसी ही रिट याचिकाएं अभी विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय को बताया गया कि ऐसे मामलों को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने के लिए स्थानांतरण याचिकाएं दायर की जा रही हैं, 

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ताकि एक ही प्रकार के अनुबंध वाले ढांचे से जुड़े कानून की व्याख्या से संबंधित समान सवालों पर एक साथ विचार किया जा सके और समानांतर कार्यवाही तथा विरोधाभासी फैसलों की संभावना से बचा जा सके। इस कदम से कानूनी विवाद का तेजी से समाधान होने की भी संभावना है, ताकि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम (जो एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है) के तहत पूरे वर्ष पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने हेतु तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को होने वाली आपूर्ति पर कोई असर न पड़े।

ऊपर दी गई दलीलों पर विचार करते हुए, न्यायालय ने यह माना कि प्रस्तावित स्थानांतरण याचिकाएं दायर की जानी चाहिए और मौजूदा मामले के संबंध में, वर्तमान इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (2025-26) के लिए इथेनॉल के आवंटन के संदर्भ में यथास्थिति कायम रखी जानी चाहिए।

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किसी भी स्तर पर यह दलील नहीं दी गई कि सरकार का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम या ई20 ब्लेंडिंग प्रोग्राम एक “प्रयोग” है।

यह साफ शब्दों में स्पष्ट किया जाता है कि ऐसा कोई भी उल्लेख कि सरकार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष ई20 कार्यक्रम को एक “प्रयोग” बताया है, गलत है और यह भारत सरकार की ओर से दी गई दलीलों को सही ढंग से नहीं दर्शाता है।

मीडिया के लोगों से अनुरोध है कि वे न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग पूरी सटीकता के साथ करें, खासकर उन मामलों में जिनमें महत्वपूर्ण राष्ट्रीय नीतिगत पहल शामिल हों।