drinking water

Pure drinking water: शुद्ध पेयजल इस्तेमाल करें, डायरिया से बचें

Pure drinking water: डायरिया प्रभावित क्षेत्र के लोग पानी को उबालकर ठंडा कर ही पियें

  • डायरिया का इलाज जिला सदर अस्पताल सहित सभी पीएचसी/सीएचसी पर निःशुल्क उपलब्ध

रिपोर्ट: पवन सिंह
मऊ, 14 अक्टूबर:
Pure drinking water: दूषित पेयजल के इस्तेमाल और साफ़-सफाई का ख्याल न रखने से डायरिया (दस्त) की बीमारी फैलती है | डायरिया पाचन तंत्र सम्बंधित एक विकार है, जिसमें मरीज को लगातार दस्त शुरू हो जाता है। यह दस्त दो से तीन दिन तक रहता है। इसके कारण बुजुर्गों के साथ छोटे बच्चों की स्थिति गंभीर हो सकती है। बच्चों के साथ-साथ बडों को भी डायरिया की शिकायत हो सकती है। ज्यादातर मामलों में मरीज उपचार से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर लेता है, लेकिन कुछ मामलों में जल्दी ठीक नहीं हो पाता है। ऐसे में चिकित्सक से परामर्श अवश्य करना चाहिए |

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्याम नरायन दुबे ने बताया कि दस्त में ओआरएस का घोल देने के साथ ही स्वास्थ्य केंद्र पर मरीज को अवश्य ले जाएं। बीमारी के दौरान बच्चों को उनकी आयु के अनुसार स्तनपान एवं ऊपरी आहार तथा भोजन अवश्य दें। बच्चे को पीने के लिए स्वच्छ पेयजल ही दिया जाए | खाना बनाने से पूर्व व बच्चे का मल साफ करने के पश्चात महिलाओं को साबुन से अपना हाथ अवश्य धो लेना चाहिए। शौच के लिए शौचालय का प्रयोग करना चाहिए। इसका इलाज जनपद के जिला सदर अस्पताल पुरुष समेत सभी पीएचसी सीएचसी पर 24 घंटे निःशुल्क उपलब्ध है।

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उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ बीके यादव ने बताया कि दस्त में मरीज का मल पानी की तरह पतला हो जाता है। मरीज को मल त्यागने के समय पेट में अधिक पीड़ा का अनुभव होता है। डायरिया के कारण शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है। यह छोटे बच्चों और बुजुर्गों को बहुत तेजी से अपने चपेट में ले लेता है। इसके लक्षणों में बच्चे को पानी जैसा लगातार मल हो, बार-बार उल्टी हो, अत्यधिक प्यास लगे, पानी न पी पाये, बुखार हो और मल में खून आ रहा हो तो उसे तत्काल समीप के स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाना चाहिए।

क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ संतोष कुमार चौरसिया ने बताया कि डायरिया की समस्या को दूर करने के लिए नारियल पानी बहुत फ़ायदेमंद होता है। अनार के छिलके को सुखाकर इसे पीस लें। इसमें शहद मिलाकर मरीज को तीन से चार बार दें। डायरिया में छोटे बच्चे को दाल का पानी पिलाना चहिये, जिससे बच्चे में दस्त की समस्या नहीं होती है। व्यक्ति को ठीक से नींद नहीं लेने से भी शरीर पर गलत प्रभाव पड़ता है इसलिए दस्त प्रभावित बच्चों और बडों को पर्याप्त मात्रा में नींद लेनी चाहिए।

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आहार में मसालेदार युक्त पदार्थ का इस्तेमाल करने से बचें। हल्दी में एंटी बैक्टीरियल तत्व होता है जो बैक्टीरिया से लड़ंने में मदद करता है। इसलिए दूध या छाछ में एक चम्मच हल्दी मिलाकर सेवन करें। सेब का सिरका डायरिया रोकने में मदद करता है, क्योंकि सेब के सिरके में प्राकृतिक एंटी बैक्टीरियल गुण होता है। पुदीना पेट सम्बंधित सभी विकारों में फायदेमंद होता है जैसे पेट दर्द, गैस, दस्त आदि समस्या को दूर करता है। दिन में 3 से 4 बार पुदीना चाय का सेवन करें। दस्त की समस्या को दूर करने के लिए अपने आहार में पोषक तत्वों को शामिल करें। मूंग की पतली दाल का भी सेवन कर सकते हैं।

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