Farmer Awareness Campaign

Farmer Awareness Campaign: भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में किसान जागरूकता अभियान

Farmer Awareness Campaign: अभियान के माध्यम से संतुलित उर्वरक, टिकाऊ खेती और मिट्टी स्वास्थ्य के लिए किसानों को जोड़ेगा संस्थान

  • अभियान मेरा गांव – मेरा गौरव के पहल के अंतर्गत वाराणसी, गाज़ीपुर, मिर्ज़ापुर, चंदौली और प्रयागराज के चयनित गाँवो में किया गया है शुरू

रिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी, 20 अप्रैल:
Farmer Awareness Campaign: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के दिशानिर्देशों के अनुरूप भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी में 45 दिवसीय व्यापक किसान जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान “ मेरा गांव-मेरा गौरव ” पहल के अंतर्गत वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, प्रयागराज और गाजीपुर जिलों के चयनित गांवों में चलाया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, वैकल्पिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों तथा कम लागत वाली वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करना है.

अवसर पर आई आई वी आर के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि यह अभियान किसानों को खेतों में रासायनिक आदानों के अत्यधिक और असंतुलित उपयोग से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, फसल की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का संतुलित प्रयोग न केवल उत्पादन और गुणवत्ता को बेहतर बनाता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति, सूक्ष्मजीव गतिविधि और दीर्घकालिक उत्पादकता को भी बनाए रखता है। इससे पर्यावरणीय दबाव कम होता है और किसानों की उत्पादन लागत में भी कमी आती है.

अभियान के शुभारंभ के तहत डॉ. ए. एन. सिंह, प्रमुख और डॉ. के. के. पांडे के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने शाहंशाहपुर तथा बिकाना (दुबरी-पहाड़ी) गांवों का दौरा किया। यहां 100 से अधिक किसानों की सभा में वैज्ञानिकों ने अभियान के उद्देश्यों की जानकारी दी और उन्हें खेत की मिट्टी की जांच, फसलवार पोषक तत्व प्रबंधन तथा संतुलित उर्वरक अपनाने की वैज्ञानिक आवश्यकता से अवगत कराया.
विशेषज्ञों ने बताया कि संतुलित उर्वरक उपयोग का मतलब केवल रासायनिक उर्वरकों को कम करना नहीं है, बल्कि फसल की जरूरत के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों का सही अनुपात में प्रयोग करना है। इससे पौधों को समय पर आवश्यक पोषण मिलता है, जड़ों का विकास बेहतर होता है, फूल-फलन में सुधार आता है और उपज की गुणवत्ता तथा बाजार मूल्य दोनों में वृद्धि होती है.

अभियान के दौरान किसानों को यह भी समझाया जाएगा कि अंधाधुंध उर्वरक उपयोग से मिट्टी की संरचना बिगड़ सकती है, पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा हो सकता है और उत्पादन लागत अनावश्यक रूप से बढ़ सकती है। इसके विपरीत, वैज्ञानिक ढंग से किया गया समेकित पोषक प्रबंधन उर्वरक उपयोग दक्षता बढ़ाता है, पोषक तत्वों की हानि घटाता है और लंबे समय तक खेत की उत्पादकता बनाए रखता है.

यह 45 दिवसीय अभियान प्रतिदिन विभिन्न गांवों और जिलों में चलाया जाएगा। इसमें आई आई वी आर की 10 टीमें, प्रत्येक में 4 से 5 वैज्ञानिक, किसानों के बीच जाकर जागरूकता कार्यक्रम, फील्ड डेमो, संवाद और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेंगी। अभियान के दौरान एकत्रित आंकड़े प्रतिदिन आईसीएआर मुख्यालय को भेजे जाएंगे, जिनका विश्लेषण बड़े पैमाने पर किया जाएगा ताकि किसान-हितैषी हस्तक्षेपों और परिणामों का प्रभावी आकलन हो सके.

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अभियान में संतुलित उर्वरक उपयोग के साथ-साथ हरी खाद, जैविक विकल्प, बायोफर्टिलाइज़र, कंसोर्शिया और बायोस्टिमुलेंट्स के उपयोग पर भी जोर दिया जाएगा। हरी खाद के प्रदर्शन हेतु स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ढैंचा, सनई, लोबिया और मूंग जैसी फसलों के चयन पर चर्चा की जाएगी, ताकि किसानों को मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने, नाइट्रोजन संधारण सुधारने और रासायनिक निर्भरता घटाने के व्यावहारिक उपाय मिल सकें.

अवसर पर डॉ. ए. एन. सिंह ने कहा, “हमारी टीम गांव-गांव जाकर किसानों को वैज्ञानिक जानकारी, प्रदर्शन और व्यवहारिक सुझाव दे रही है ताकि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप टिकाऊ कृषि अपनाएं।” डॉ. के. के. पांडे ने कहा, “हरी खाद, जैव-उर्वरक और प्राकृतिक कृषि विकल्प खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण-अनुकूल बना सकते हैं।” आईआईवीआर ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेत स्तर पर परिवर्तन लाने का प्रयास है। इसके माध्यम से किसानों को ऐसी तकनीकों से जोड़ा जाएगा जो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी, पौध और पर्यावरण—तीनों की सुरक्षा सुनिश्चित करें.