International Fellowship: बी एच यू की शोधार्थी डॉ प्रिया देव को मिला अन्तर्राष्ट्रीय फेलोशिप
International Fellowship: आईएमएस-बीएचयू की शोधार्थी डॉ. प्रिया देव को यूरोपीय संघ के प्रतिष्ठित साइलाइफलैब पल्स फ़ेलोशिप से किया गया सम्मानित
- International Fellowship: न्यूरोलॉजी विभागध्यक्ष प्रो अभिषेक पाठक के मार्ग दर्शन में डॉ प्रिया कर रहीं हैं पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप
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📲 WhatsApp पर शेयर करेंरिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी, 01 जुलाई: International Fellowship: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के न्यूरोलॉजी विभाग की वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो डॉ. प्रिया देव को यूरोप के प्रतिष्ठित साइलाइफलैब पल्स फ़ेलोशिप के लिए चयनित किया गया है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की अत्यंत प्रतिष्ठित फ़ेलोशिप यूरोपीय संघ के होराइज़न यूरोप प्रोग्राम के अंतर्गत मैरी स्क्लोडोव्स्का-क्यूरी एक्शन्स (एमएससीए कोफंड) द्वारा सह-वित्तपोषित है।
चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. अभिषेक पाठक के मार्गदर्शन में डॉ. प्रिया देव पोस्ट-डॉक्टोरल शोध कार्य कर रही हैं। इस प्रतिष्ठित फ़ेलोशिप (International Fellowship) के अंतर्गत वे ओरेब्रो यूनिवर्सिटी, स्वीडन तथा यूरोपियन मॉलेक्यूलर बायोलॉजी लेबोरेटरी – यूरोपियन बायोइन्फॉर्मेटिक्स इंस्टीट्यूट (ईएमबीएल-ईबीआई), यूनाइटेड किंगडम जैसे विश्व-प्रसिद्ध अनुसंधान संस्थानों में उन्नत जैव-चिकित्सीय एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स अनुसंधान करेंगी। यह फ़ेलोशिप आगामी तीन वर्षों की अवधि के लिए प्रदान की गई है।
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साइलाइफलैब पल्स फ़ेलोशिप यूरोप की सर्वाधिक प्रतिष्ठित पोस्ट-डॉक्टोरल फ़ेलोशिप योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य उत्कृष्ट युवा वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध, प्रशिक्षण, नवाचार तथा बहुविषयी सहयोग के अवसर प्रदान करना है।
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इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए प्रो. पाठक ने कहा, “डॉ. प्रिया देव की यह (International Fellowship) उपलब्धि उनकी वैज्ञानिक प्रतिभा, कठिन परिश्रम और उत्कृष्ट अनुसंधान के प्रति समर्पण का प्रमाण है। यह न्यूरोलॉजी विभाग एवं चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बीएचयू के लिए भी अत्यंत गर्व का विषय है कि हमारे युवा शोधकर्ताओं को वैश्विक स्तर पर इतनी प्रतिष्ठित पहचान मिल रही है। हमें विश्वास है कि उनका शोध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को और सुदृढ़ करेगा तथा जैव-चिकित्सीय विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देगा।”

