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Online Kavya Goshthi; हिन्दी दिवस विशेष – कलामंथन सतलुज समूह द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन

Online Kavya Goshthi: “नई पीढ़ी में हिन्दी के प्रति गौरव व सम्मान लाना हमारा उद्देश्य है। जनमानस की भाषा जन जन के हृदय में हो यही सोच कलामन्थन की है।

दिल्ली, 11 सितम्बर: Online Kavya Goshthi: सितम्बर माह में हिन्दी दिवस का उल्लास हर ओर दिखता है।इसीक्रम में कलामंथन सतलुज समूह द्वारा मासिक ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम खास हिन्दी भाषा को समर्पित किया गया व इसका संचालन सुनीता ठाकुर व मुस्कान सागर ‘सना’ ने किया।

सर्वप्रथम सुनीता ठाकुर ने महादेवी वर्मा जी को श्रृद्धासुमन अर्पित किए व मुस्कान सागर ने हिन्दी के पितामह भारतेंदु जी के योगदान पर प्रकाश डाला। इसके बाद एक से बढ़कर एक कविताओं का दौर चला। अर्चना सक्सेना जी ने चांद- चांदनी के मिलन,विरह को प्रस्तुत किया, तनुजा श्रीवास्तव जी ने कृष्ण-राधा संवाद रूप में गीत प्रस्तुत किया।

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Online Kavya Goshthi: रीना सिंह ने ‘बेसिक शिक्षा’ रचना से अपने उद्गार व्यक्त किये, श्वेता श्रीवास्तव जी ने यादें वफ़ा सुनाकर मन मोह लिया। डॉ गुरमीत सिंह जी ने हास्य व्यंग से श्रोताओं का मन मोह लिया और गम्भीर मुद्दे पर कटाक्ष प्रस्तुत किया। मीना सिंह ‘मीन’ने ‘ख़ून हुआ है पर लाश ‘कहां कविता प्रस्तुत की रूचि सिंघल जी ने ‘प्रेम में विरह’ गीत को मधुर वाणी दी। तरूणा पुंडीर जी ने‘ संग तुम्हारे’ प्रेम गीत को सुनाया। ऑंचल आशीष ने अपनी मर्मस्पर्शी कविता से सभी को बचपन और मातृत्व याद दिलाया। रोज़ा अहमद ने ‘कसक’ रचना को पढ़ा।

मुख्य अतिथि के रूप में कलामंथन की संस्थापिका निर्झरा सरिता जी व अंशु सक्सेना जी मौजूद रहीं व रचनाकारों का उत्साहवर्धन करती रही।
ऑनलाइन कार्यक्रम (Online Kavya Goshthi)में श्रोता अंत तक जुड़े रहे और काव्यपाठ का आनन्द लिया। “नई पीढ़ी में हिन्दी के प्रति गौरव व सम्मान लाना हमारा उद्देश्य है। जनमानस की भाषा जन जन के हृदय में हो यही सोच कलामन्थन की है।”ये कहते हुए कलामन्थन की संस्थापिका सरिता निर्झरा ने कार्यक्रम का समापन किया।

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