Millet Dairy Superfood

Millet-Dairy Superfood: बीआरएबीयू में प्रो. दिनेश चन्द्र राय की अगुवाई में बना बाजरा-डेयरी सुपरफूड

Millet-Dairy Superfood: शोध टीम ने रजोनिवृति के बाद की महिलाओं हेतु बाजरा और डेयरी से बनाया फंक्शनल फ़ूड

  • प्रयोगशाला परिक्षण के दौरान इस लड्डू में कैल्शियम और फासफोरस पाया गया है प्रचुर मात्रा में

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रिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी, 01 मई:
Millet-Dairy Superfood: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सीनियर प्रोफेसर और बी आर अंबेडकर बिहार विश्वविद्याल के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय की अगुवाई में एक प्रतिष्ठित बहुसंस्थानीय शोध टीम ने रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं के लिए बाजरा और डेयरी से बना फंक्शनल फूड तैयार किया है। टीम ने घी को कैरियर बनाकर बाजरे के पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से उपलब्ध कराने वाला लड्डू विकसित किया है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका फूड बायोमैक्रोमॉलेक्यूल्स (इम्पैक्ट फैक्टर 5.4) में प्रकाशित हुआ है।

शोध टीम में क्वांटम यूनिवर्सिटी और अचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या की मृदुला पांडे, साधना सिंह, राजीव गांधी विश्वविद्यालय इटानगर के अशोक कुमार यादव तथा छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएम), कानपुर के अमन राठौर और हरदेश राजपूत शामिल रहे।

अपनी टीम की सफलता पर प्रसन्न प्रो. राय ने कहा, “इस शोध का उद्देश्य समाज की भलाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। हमने पारंपरिक खाद्य ज्ञान को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ा है।”प्रो. राय ने आगे कहा, “यह मॉडल ग्रामीण उत्पादकों और डेयरी सहकारिताओं को स्थानीय कच्चे माल से शेल्फ-स्टेबल हाई वैल्यू प्रोडक्ट बनाने का मौका देता है।

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प्रयोगशाला परीक्षणों में यह लड्डू कैल्शियम और फॉस्फोरस से भरपूर पाया गया तथा यह कमरे के तापमान पर 90 दिनों तक स्थिर रहता है।प्रो. राय ने कहा, “यह शोध भारतीय खाद्य उद्योग पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। इससे किसान और डेयरी सहकारिताएं कम मूल्य वाले कच्चे माल से आगे बढ़कर हाई वैल्यू हेल्थ फूड मार्केट में प्रवेश कर सकेंगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और देश में मूल्यवर्धन बढ़ेगा।

प्रो. राय ने जोड़ा कि यह शोध मिलेट और डेयरी क्षेत्र को जोड़ते हुए पारंपरिक भारतीय खाद्य प्रथाओं के जरिए रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं की पोषण जरूरतों को पूरा करने का व्यावहारिक तरीका प्रस्तुत करता है। बीएचयू और बीआरएबीयू के शैक्षणिक जगत और एलुमनी एसोसिएशन ने इस रिसर्च उपलब्धि पर प्रो. राय को बधाई दी है।