New chairman of Hindi advisory committee: जेपी नड्डा बने हिंदी सलाहकार समिति के अध्यक्ष
New chairman of Hindi advisory committee: रसायन और उर्वरक मंत्रालय में हिंदी सलाहकार समिति का गठन
नई दिल्ली, 26 फरवरी: New chairman of Hindi advisory committee: भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय में हिंदी सलाहकार समिति का फिर से गठन हो गया है। केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की अगुवाई वाली इस समिति की उपाध्यक्ष राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल को बनाया गया है। पुनर्गठन के संबंध में भारत के राजपत्र (गज़ट) में संकल्प भी प्रकाशित कर दिया गया है।
समिति के सदस्य
मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति में संसदीय कार्य मंत्रालय के तरफ से दो लोकसभा और दो राज्यसभा सांसद नामित किए गए हैं। नामित सदस्यों में पश्चिम बंगाल के अलीपुर द्वार के लोकसभा सांसद मनोज तिग्गा, उत्तर प्रदेश के देवरिया के लोकसभा सांसद शशांक मणि, नागालैंड से राज्यसभा सांसद एस फान्गनान कोन्याक, बिहार से राज्यसभा सांसद संजय झा शामिल हैं। वहीं उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल से लोकसभा सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह और सोनीपत के लोकसभा सांसद सतपाल ब्रह्मचारी को संसदीय राजभाषा समिति ने नामित किया है।
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4 सदस्य रसायन और उर्वरक मंत्रालय, 1 सदस्य विश्व हिंदी परिषद, 1 सदस्य हिंदी प्रचार सभा हैदराबाद और 3 सदस्य गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की तरफ से नामित किए गए हैं। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अधीन आने वाले सभी विभागों उर्वरक, रसायन एवं पेट्रोरसायन और औषध के सचिव सहित कुल 37 सरकारी सदस्य भी सलाहकार समिति का हिस्सा होंगे।
हिंदी सलाहकार समिति के कार्य
समिति का कार्य संविधान में राजभाषा संबंधी प्रावधानों, केंद्रीय हिंदी समिति के नीतिगत निर्णयों, राजभाषा अधिनियम व नियम तथा राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय की तरफ से इस विषय में जारी किए गए अनुदेशों और निर्देशों के अनुसार रसायन और उर्वरक मंत्रालय और इसके अधीन आने वाले सभी कार्यालयों में होने वाले सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग की समीक्षा करना और सलाह देना है।
समिति का कार्यकाल
New chairman of Hindi advisory committee: हिंदी सलाहकार समिति का कार्यकाल गठन की तारीख से तीन साल का होता है। विशेष परिस्थितियों में ही इस कार्यकाल को बढ़ाया या घटाया जा सकता है। सांसद तभी तक समिति के सदस्य रहते हैं जब तक उनका कार्यकाल बना रहता है। वहीं पदेन सदस्य संबंधित पद पर कार्य करने तक ही सदस्य बने रह सकते हैं। किसी सदस्य के त्यागपत्र या मृत्यु से खाली हुई जगह पर आने वाला नया नामित सदस्य समिति के शेष कार्यकाल तक के लिए ही सदस्य रहता है।
रसायन और उर्वरक मंत्रालय की इस हिंदी सलाहकार समिति की बैठकें नई दिल्ली स्थित मुख्यालय के अतिरिक्त अन्य जगहों पर भी आयोजित की जा सकती हैं.


