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VDA: वी डी ए का अभिनव पहल, काशी की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया आयाम

VDA: वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा काशी की सांस्कृतिक विरासत को और अधिक सशक्त बनाने हेतु निर्मित, आनंद कानन कला गुरुकुल बनेगा भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का आधुनिक केंद्र

  • वी डी ए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा के अनुसार गंगा तट पर स्थित रविदास पार्क में विकसित हो रहे आंनद कानन कला गुरुकुल केवल एक प्रशिक्षण संस्थान ही नहीं बल्कि भारतीय गुरुकुल परंपरा पर आधारित होगा एक समग्र सांस्कृतिक केंद्र

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रिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी, 05 जुलाई:
VDA: भारतीय संस्कृति, संगीत, नृत्य एवं ललित कलाओं की गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करने तथा काशी को वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा गंगा किनारे नगवा क्षेत्र में रविदास पार्क स्थित, आनंद कानन में आनंद कानन कला गुरुकुल की अभिनव एवं ऐतिहासिक संकल्पना को विकसित किया जा रहा है।

इस सम्बन्ध में वी डी ए उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने बताया कि, यह गुरुकुल केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं होगा, बल्कि भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों एवं कला-साधना पर आधारित एक समग्र सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा, जहाँ संगीत, नृत्य, वादन, नाट्य एवं चित्रकला जैसी विविध भारतीय कलाओं का प्रशिक्षण प्राचीन भारतीय परंपरा के अनुरूप प्रदान किया जाएगा।

वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा के दिशा निर्देश में बन रहे इस महत्वपूर्ण परियोजना की सांस्कृतिक एवं स्थापत्य परिकल्पना आर्टिस्ट मनीष खत्री ने तैयार की है। इसके साथ ही सुबह-ए-बनारस आनंद कानन के संयोजक रत्नेश वर्मा सहित अनेक कला गुरुओं के सहयोग से यह अभिनव सांस्कृतिक संकल्पना साकार रूप ले रही है. प्रस्तावित परिसर का विकास वैदिक गुरुकुल ग्राम की अवधारणा पर किया जा रहा है, जहाँ प्राकृतिक वातावरण, भारतीय स्थापत्य शैली एवं आध्यात्मिक परिवेश का समन्वय होगा। गंगा तट के समीप स्थित यह परिसर विद्यार्थियों एवं कलाकारों को भारतीय संस्कृति के जीवंत अनुभव के साथ कला-साधना का अनूठा अवसर प्रदान करेगा।

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गुरुकुल में शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय संगीत, लोकसंगीत, कथक, शास्त्रीय एवं लोकनृत्य, विभिन्न वाद्ययंत्रों का प्रशिक्षण, नाट्यकला, चित्रकला, छायाचित्र प्रदर्शनी एवं कार्यशालाओं सहित अनेक विधाओं का समग्र प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कला प्रदर्शनियों एवं कार्यशालाओं के माध्यम से कलाकारों को व्यापक मंच भी उपलब्ध कराया जाएगा।

श्री बोरा ने इसके उद्देश्य के बारे में बताया कि, इसके द्वारा ना केवल कुशल कलाकार तैयार होंगे , बल्कि ऐसे सांस्कृतिक दूतों का निर्माण करना है जो विश्व मंच पर भारतीय संस्कृति, परंपरा एवं सनातन जीवन मूल्यों का प्रभावी प्रतिनिधित्व कर सकें. आपने कहा कि “आनंद कानन कला गुरुकुल” भविष्य में न केवल काशी बल्कि सम्पूर्ण भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा देश-विदेश के विद्यार्थियों, कलाकारों एवं शोधार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र सिद्ध होगा। यह पहल काशी की सनातन सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी.