Release of Chandan Kiwad

Release of Chandan Kiwad: बी एच यू में मालिनी अवस्थी की कृति चन्दन किवाड़ का हुआ विमोचन

Release of Chandan Kiwad: पुस्तकों की यह खूबी होती है कि पढ़ने वाला अपने दर्पण से समझता है और लिखने वाला अपने दर्पण से – कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी

  • चन्दन किवाड़’ (Release of Chandan Kiwad) पुस्तक चाक्षुष यज्ञ भी है और श्रुत यज्ञ भी: प्रो. अवधेश प्रधान
  • लोक की भूमि हमारी पूर्वजों ने बनाई है: मालिनी अवस्थी

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रिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी, 30 अप्रैल:
Release of Chandan Kiwad: भारत अध्ययन केन्द्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के तत्वावधान में ‘भारत अध्ययन साहित्य संवाद’ के अन्तर्गत प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी द्वारा प्रणीत पुस्तक ‘चंदन किवाड़’ पर लोकार्पण सह परिचर्चा का आयोजन किया गया। आयोजन की अध्यक्षता कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने की। उन्होंने कहा कि मालिनी जी एक विलक्षण व्यक्तित्व हैं उन्होंने संगीत और गायन के साथ साथ लेखनी में सत्ताईस अध्यायों की पुस्तक भी लिखी। पुस्तकों की यह खूबी होती है कि पढ़ने वाला अपने दर्पण से समझता है और लिखने वाला अपने दर्पण से।

उन्होंने आगे कहा कि यह पुस्तक आत्मकथात्मक लगती है क्योंकि उन्होंने जिन भी गीतों को चुना है, प्रसंग को चुना है, उनका मालिनी जी के जीवन से जुड़ाव है। पुस्तकों में एक प्रतिभा होती है जो वर्तमान पीढ़ी को आगामी पीढ़ी से जोड़ने का काम करती है। कार्यक्रम के बारे में कुलपति ने कहा कि ऐसे बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विमर्श हमारी समृद्ध परंपराओं को पुनर्जीवित करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि काशी सदैव ज्ञान, संवाद और सृजन की भूमि रही है तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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विशिष्ट वक्ता प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि मालिनी जी अवध की परम्परा और आशीर्वाद की धारा से अभिसिंचित होकर खुद को अवध का मानती हैं, हम उन्हें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का मानते हैं। वे विदुषी हैं, चन्दन किवाड़ से उनका दूसरा परिचय मिलता है। संगीत की दुनिया में पद्मश्री जैसे अलंकरण ऐसे साधकों से ही भव्य होते हैं। इस पुस्तक को पढ़कर आपकी आँखें और आपका हृदय पिघल पड़ेगा। मालिनी जी ने सारी कीर्ति को इस पुस्तक में साध लिया है।

लेखकीय वक्तव्य देते हुए मालिनी अवस्थी ने कहा कि भारत अध्ययन केंद्र उनके लिए एक परिवार है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक को उन्होंने यात्राओं के दरम्यान लिखा है। लोकगीतों की कथाओं के मनोविज्ञान और समाजशास्त्र पर काम होना बाकी है। उन्होंने कहा कि वे लोकगीत गाती हैं तो उसके पीछे संस्कृत का हाथ है। संस्कृत विषय नहीं होता तो उन्हें भारत को देखने की मुकम्मल दृष्टि नहीं मिलती।

प्रो. वशिष्ठ द्विवेदी ‘अनूप’, विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग ने कहा कि मालिनी जी ने लोक की पीड़ा को हृदय की आंखों से देखा है,यह चन्दन का किवाड़ (Release of Chandan Kiwad) लोक का किवाड़ है जो चन्दन की सुगन्ध लिए सजल कंठ स्त्रियों के भीतर विश्वास को जिन्दा रखता है। प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग की प्रो. अर्चना वर्मा ने कहा कि यह किताब हृदय के अंतः की मोती से पिरोकर लिखी गई है। उन्होंने कहा कि चंदन धारणीयता का प्रतीक है जिसमें सुगंध की विद्यमानता हमेशा रहती है और किवाड़ वह द्वार है जिसके जरिए हम लोक में प्रवेश करते हैं।

स्वागत वक्तव्य देते हुए भारत अध्ययन केन्द्र के समन्वयक प्रो. शरदिन्दु तिवारी ने बताया कि 2017 से 2022 तक मालिनी अवस्थी भारत अध्ययन केन्द्र की संस्थापिका सदस्या रहीं हैं। संचालन डॉ. अमित कुमार पाण्डेय ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्ञानेंद्र नारायण राय ने दिया.