Lakshmi Puja:धनतेरस 2026 आज: मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा से लेकर खरीदारी तक, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Lakshmi Puja: आज से पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत, धनतेरस पर सोना-चांदी और नए बर्तन खरीदने की परंपरा; भगवान धन्वंतरि की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करेंगे श्रद्धालु।
🔥 इस खबर को WhatsApp पर जरूर शेयर करें 📲
📲 WhatsApp पर शेयर करेंअहमदाबाद। Lakshmi Puja: देशभर में आज, शुक्रवार 6 नवंबर 2026 को धनतेरस का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व दीपावली से पहले आने वाले पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। घरों में साफ-सफाई, दीप सजावट, पूजा-अर्चना और शुभ वस्तुओं की खरीदारी के जरिए लोग सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। वर्ष 2026 में त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह लगभग 10:30 बजे शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह लगभग 10:47 बजे तक रहेगी। त्रयोदशी तिथि के दौरान प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इसी कारण इस वर्ष धनतेरस का मुख्य पर्व 6 नवंबर को मनाया जा रहा है।
मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का महत्व
धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी के रूप में पूजा जाता है, जबकि भगवान कुबेर को धन का अधिपति माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। कई परिवार इस दिन अपने व्यापारिक प्रतिष्ठानों, दुकानों और कार्यालयों में भी विशेष पूजा करते हैं। व्यापारी वर्ग के लिए यह दिन नए बही-खाते शुरू करने और कारोबार में उन्नति की कामना करने का भी अवसर होता है।
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसलिए इस पर्व को केवल धन-संपत्ति से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और आरोग्य से भी जोड़कर देखा जाता है। लोग अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं।
धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?
धनतेरस के दिन सोना, चांदी, आभूषण और नए बर्तन खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कई परिवार अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोने या चांदी के सिक्के, आभूषण, पीतल, तांबे या स्टील के बर्तन खरीदते हैं। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई नई वस्तु घर में शुभता और समृद्धि का प्रतीक होती है।
यह भी पढ़ें:- Ramayana: ‘रामायण’ को दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स, रणबीर और यश की एक्टिंग की तारीफ
हालांकि, धनतेरस पर खरीदारी करना किसी धार्मिक अनिवार्यता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। परिवार अपनी आर्थिक क्षमता और जरूरत के अनुसार वस्तुएं खरीद सकते हैं। सोना-चांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता, हॉलमार्क, वजन और मेकिंग चार्ज की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए। केवल परंपरा के चलते अपनी आर्थिक स्थिति पर अनावश्यक बोझ डालने से बचना भी जरूरी है।
कई क्षेत्रों में धनतेरस पर झाड़ू, धनिया के साबुत बीज और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदने की भी परंपरा है। अलग-अलग राज्यों और समुदायों में इन रीति-रिवाजों का स्वरूप अलग हो सकता है।
धनतेरस की पूजा विधि
धनतेरस के दिन घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करके शाम को पूजा की तैयारी की जाती है। पूजा स्थल पर मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। इसके बाद दीपक, धूप, फूल, अक्षत, रोली, मिठाई और फल आदि अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार मंत्रों का जाप और आरती करते हैं।
शाम के समय घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाए जाते हैं। कई परिवार घर के बाहर यमदीप भी जलाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमराज के नाम से दीपदान करने से परिवार की रक्षा और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की कामना की जाती है। इस परंपरा को यम दीपदान कहा जाता है।
Shop your favourites at exciting prices.
जानें पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर पूजा का समय शहर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है, क्योंकि प्रदोष काल और लग्न की गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर की जाती है। नई दिल्ली के लिए 6 नवंबर को लक्ष्मी-कुबेर पूजा का समय शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक बताया गया है। अहमदाबाद के लिए प्रकाशित समय-सारणी में शाम 6:30 बजे से 8:28 बजे तक का समय दिया गया है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने शहर के पंचांग या स्थानीय पुरोहित से समय की पुष्टि करनी चाहिए।
ध्यान देने वाली बात यह है कि पूजा का शुभ मुहूर्त और खरीदारी का शुभ समय अलग-अलग हो सकते हैं। खरीदारी के लिए पूरे दिन के पंचांग और स्थानीय शुभ चौघड़िया को देखा जा सकता है।
दीपोत्सव की शुरुआत, घरों में उत्सव का माहौल
धनतेरस के साथ ही बाजारों में दीपावली की रौनक बढ़ गई है। आभूषणों की दुकानों, बर्तन बाजारों, इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों में ग्राहकों की आवाजाही देखने को मिल रही है। घरों में रंगोली, सजावट और दीप जलाने की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
धनतेरस का संदेश केवल धन अर्जित करने तक सीमित नहीं है। यह पर्व स्वास्थ्य, स्वच्छता, परिवार की खुशहाली और सकारात्मक जीवन की कामना से भी जुड़ा है। श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ जरूरतमंदों की सहायता और आपसी सद्भाव को भी उत्सव का हिस्सा बना सकते हैं। इसी भावना के साथ देशभर में धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है और दीपावली के उल्लास की शुरुआत हो रही है।

