National Conference Ayurveda: शिवाजी कॉलेज में शतावरी पर राष्ट्रीय सम्मेलन
National Conference Ayurveda: आयुर्वेद को बढ़ावा! शिवाजी कॉलेज में शतावरी पर राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों की बड़ी चर्चा
शिवाजी कॉलेज में ‘शतावरी: भारत की आयुर्वेदिक विरासत का पुनर्जीवन’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न
दिल्ली, 19 मार्च: National Conference Ayurveda: दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित शिवाजी कॉलेज में 16-17 मार्च को शतावरी भारत की आयुर्वेदिक विरासत का पुनर्जीवन विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन एवं कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह सम्मेलन राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित है।
सम्मेलन की मुख्य थीम आयुष मंत्रालय की ही राष्ट्रीय पहल शतावरी बेहतर स्वास्थ्य के लिए के साथ जुड़ी है जिसका लक्ष्य है शतावरी औषधीय पौधे के संबंध में जागरूकता, वैज्ञानिक शोध और सतत कृषि को बढ़ावा देना। जो भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के रूप में बड़े पैमाने पर उपयोग होती है।
पहले दिन सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए शिवाजी कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर वीरेंद्र भारद्वाज ने इस कार्यक्रम की सफलता, महत्व एवं संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के सम्मेलन न केवल किसी एक औषधीय पौधे शतावरी के माध्यम से भारत की उन्नत और समृद्ध औषधीय एवं आयुर्वेदिक परंपरा को स्थापित करते हैं बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की वर्तमान और समकालीन प्रासंगिकता को भी दर्शाते हैं।

इस संगोष्ठी और कार्यशाला की महत्ता इस बात में भी निहित है कि यह अकादमिक अभियान से अधिक एक सामाजिक जागरूकता अभियान बने। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में अपनी बात रखते हुए राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रोफेसर महेश कुमार दाधीच ने कहा कि हमने हमेशा दवा के साथ खान पान और रहन सहन पर बल दिया है।
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उन्होंने आगे कहा कि लोग कहते हैं नाम में कुछ नहीं रखा लेकिन हमारे शास्त्रों में किसी भी शब्द को निरर्थक नहीं माना गया है। हमने आंवला, मोरिंगा, अश्वगंधा और अब शतावरी के औषधीय गुणों को जन जन तक पहुंचाने के लिए अभियान चलाया है।
आने वाला समय प्राकृतिक चिकित्सा का होगा। इसलिए आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति की ओर लौटने की जरूरत है।
सम्मेलन में बतौर विशिष्ट अतिथि एवं अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप कुमार प्रजापति ने छत्रपति शिवाजी महाराज की महान परंपरा और विरासत का उल्लेख करते हुए शतावरी को एक सदाबहार पौधा बताया जो बारह महीने हरा रहता है।

दूसरे दिन का आरंभ (National Conference Ayurveda) आयुर्वेद आयुष मंत्रालय के पूर्व सलाहकार डॉ. डी सी कटोच के वक्तव्य से हुआ अपने वक्तव्य में डॉ. कटोच ने इस तरह के सम्मेलन की महत्ता को बताते हुए कहा कि आज हमें प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद को अपने जीवन और व्यवहार में शामिल करने की जरूरत है तभी इस तरह के सम्मेलन और कार्यशाला सार्थक होंगी।
समापन सत्र में मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर रबिनारायण आचार्य महानिदेशक (सी.सी.आर.ए.एस) ने कहा कि शिवाजी कॉलेज के लिए हमारे संस्थान के दरवाजे सदैव खुले हैं, आप आएं और आयुर्वेद के शोध परियोजनाओ में हमारे साथ मिलकर काम करें। इसी तरह से हम अपनी इस समृद्ध विरासत को जन जन तक पहुंचा पाएंगे। जो इस सम्मेलन का लक्ष्य भी है।
इस दो दिवसीय कार्यशाला (National Conference Ayurveda) एवं सम्मेलन में अलग-अलग क्षेत्र से विशेषज्ञ, शोधार्थी, विद्यार्थी एकेडमिक और औद्योगिक जगत के जाने-माने एंटरप्रेन्योर्स एवं छात्रों ने भागीदारी की। शतावरी एवं औषधीय पौधों से संबंधित लगभग अस्सी पोस्टर प्रस्तुती हुई। और लगभग पचास शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रील-मेकिंग, नारा लेखन (स्लोगन राइटिंग), इन्फोग्राफिक्स और डिजिटल फोटोग्राफी जैसी विभिन्न छात्र प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
यह सम्मेलन औषधीय पौधों (National Conference Ayurveda) की वैज्ञानिक कृषि और व्यावसायिक पहलुओं पर बातचीत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में स्थापित हुआ जहां आयुर्वेद, फार्मा, कृषि विज्ञान, जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, स्वास्थ्य विज्ञान जैसे अलग-अलग क्षेत्र के विशिष्ट विद्वानों ने अपने ज्ञान और शोध का आदान प्रदान किया।

प्राचार्य एवं अतिथियों द्वारा कॉलेज के हर्बल गार्डन में शतावरी पौधों का रोपण किया गया। “भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड द्वारा प्रदत्त 18.9 लाख रुपये की शोध परियोजना के हिस्से के रूप में इस सम्मेलन का
आयोजन किया गया। इसके मुख्य शोधकर्ता शिवाजी कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) के डॉ. अनुराग मौर्य, डॉ. स्मिता त्रिपाठी और डॉ. जितेंद्र कुमार चौधरी हैं।”
इस सम्मेलन में 1 लाख शतावरी के पौधों का जन-जन में वितरण करने का लक्ष्य तय किया गया।
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