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World Record: गंगा तट पर स्प्रिंकलर की फुहारों के बीच खिलीं कलियां, कैमरे रख रहे पल-पल का हिसाब

  • ढाई महीने पहले जहां गिने गए थे ढाई लाख पौधे, वहां अब तीन से पांच फीट ऊंची हरी दीवार
  • दौरे पर पहुंचे महापौर और पार्षदों की पूरी टोली ने परखी दावों की जमीनी हकीकत

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रिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी, 18 मई:
World Record: ठीक ढाई महीने पहले (1 मार्च को) जब नगर निगम ने डोमरी (सुजाबाद) में महज एक घंटे के भीतर 2.51 लाख पौधे रोपकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था, तब कई शंकाएं थीं। सवाल था कि क्या ये पौधे कागजों से निकलकर जमीन पर टिक पाएंगे? सोमवार को इसी कौतूहल और दावों की हकीकत को ऑन-स्पॉट परखने के लिए महापौर अशोक कुमार तिवारी के संग 110 पार्षदों का पूरा कुनबा डोमरी की सरजमीं पर उतरा। लेकिन, इस बार नजारा वीरान जमीन का नहीं, बल्कि सिर उठाती एक नई ‘हरित विरासत’ का था।

350 बीघे में फैला यह मियावाकी वन अब महज़ एक सरकारी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि काशी के फेफड़ों को नई जिंदगी देने वाली ‘ग्रीन काशी’ के रूप में धड़कने लगा है।
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मौके पर कदम रखते ही सरकारी फाइलों के आंकड़े पीछे छूट जाते हैं और प्रकृति का जीवंत रूप सामने आता है। महज ढाई महीने के अल्पावधि समय में ही मियावाकी तकनीक का करिश्मा दिखने लगा है। जो पौधे कभी उंगलियों के पोरों जितने थे, वे अब तीन से पांच फीट के कद्दार किशोर बन चुके हैं। कई डालियों पर नन्हीं कलियां चटक चुकी हैं और फूलों ने अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। कल तक जहां सन्नाटा था, वहां अब चिड़ियों की चहचहाहट और ‘चूं-चूं’ का कोलाहल कानों में रस घोल रहा है। वन को जिंदा रखने के लिए यहां का सिस्टम भी स्मार्ट है; आधुनिक ‘रेनगन’ (स्प्रिंकलर) से जब रिमझिम फुहारें छोड़ते हैं, तो पौधों की जड़ों तक हवा और नमी का सुचारू संचार होने लगता है।

इस रिकॉर्ड को बचाए रखने के लिए 25 सीसीटीवी कैमरे पल-पल की निगरानी कर रहे हैं, रात को दिन बनाने के लिए 20 हाईमास्क लाइटें लगी हैं और गार्ड्स चौबीसों घंटे मुस्तैद हैं।

सिर्फ ऑक्सीजन नहीं, भविष्य की तिजोरी भी भरेगा यह जंगल
​यह महावन सिर्फ पर्यावरण की सेहत ही नहीं सुधारेगा, बल्कि आने वाले दिनों में नगर निगम की माली हालत को भी तंदुरुस्त करेगा। मध्य प्रदेश की एमबीके संस्था के साथ हुए समझौते के तहत तीसरे वर्ष से ही निगम को 2 करोड़ रुपये की आय होने लगेगी, जो सातवें वर्ष तक 7 करोड़ रुपये वार्षिक तक पहुंच सकती है।

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इस सघन जंगल में शीशम, सागौन और अर्जुन जैसी 27 बहुमूल्य देशी प्रजातियों के पेड़ लगाए गए हैं, जो भविष्य में आय सृजन का एक बड़ा और मजबूत जरिया बनेंगे। इसके साथ ही, यहां अश्वगंधा और गिलोय जैसी औषधीय संजीवनी की पूरी खेप मौजूद है। गंगा के ठीक किनारे तैयार हो रहा यह अनूठा इको-सिस्टम काशी की प्राचीन आभा में एक आधुनिक और बेहद जरूरी ऑक्सीजन बैंक का इजाफा कर रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा।

अवसर पर पार्षदों की टीम में मुख्य रूप से उपसभापति नरसिंह दास, सुरेश चौरसिया, अमरदेव यादव, प्रमोद राय, , हनुमान प्रसाद , प्रवीण राय, सुशील गुप्ता योगी, मदन मोहन तिवारी, मदन मोहन दुबे, राजकुमार चौधरी, अशोक मौर्या, बृजेश चंद्र श्रीवास्तव सहित अन्य लोग शामिल थे ।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ के संकल्प और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन ने इस बंजर दिखने वाली जमीन की तकदीर बदल दी है। यह सफलता यूपी के बाकी नगर निकायों के लिए एक नजीर है। मियावाकी तकनीक के दम पर अगले 2-3 साल में यह क्षेत्र गंगा किनारे एक अभेद्य हरित दीवार की तरह नजर आएगा।

काशी ने हमेशा अपनी सांस्कृतिक और प्राचीन परंपराओं को सहेज कर दुनिया को राह दिखाई है, लेकिन डोमरी के इस महाअभियान ने साबित कर दिया है कि पर्यावरण जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दों पर भी काशी अब दुनिया का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।