नर से नारायण की यात्रा: गिरीश्वर मिश्र(Nar se narayan ki yatra)
इन्हीं के समानांतर धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष के पुरुषार्थों को भी उन्होंने रेखांकित किया. उनका मानना था कि वैयक्तिकता के विरुद्ध जा कर अंतत: साम्यवाद भी व्यक्ति को कुचल … Read More
इन्हीं के समानांतर धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष के पुरुषार्थों को भी उन्होंने रेखांकित किया. उनका मानना था कि वैयक्तिकता के विरुद्ध जा कर अंतत: साम्यवाद भी व्यक्ति को कुचल … Read More
~~महात्मा गांधी की पुण्य तिथि~~(Mahatma Gandhi Punyatithi) Mahatma Gandhi Punyatithi: महात्मा, बापू, और राष्ट्रपिता जैसे विशेषणों के साथ स्मरण किये जाने वाले देश के आत्मीय महापुरुष ने बड़ी गहनता के … Read More
मनुष्य द्वारा रची कुछ बेहद ताकतवर परिभाषाओं में देश, राज्य, राष्ट्र और गणतंत्र जैसी कोटियाँ भी आती हैं जो धरती पर सामुदायिक-सांस्कृतिक यात्रा में पथ प्रदर्शक की भूमिकाएं अदा करती … Read More
इस देश-गान में शस्य-श्यामल, सुखद, और वरद भारत माता की वन्दना की गई है । इस तरह गुलामी के दौर में देश में सब के प्राण बसते थे और देश … Read More
~~23 जनवरी पराक्रम (Parakram Diwas) दिवस पर विशेष~~ Parakram Diwas: आज देश-सेवा के नाम पर राजनीति में दम-ख़म आजमाने वाले हर तरह की सौदेबाजी करने पर उतारू हैं. उन्हें सत्ता … Read More
हम सब यह देखते हैं कि दैनंदिन जीवन के क्रम में हमारे अनुभव वाचिक कोड बन कर एक ओर स्मृति के हवाले होते रहते हैं तो दूसरी ओर स्मृतियाँ नए-नए … Read More
भारतीय संसद के सदनों में उनकी सुदीर्घ उपस्थिति राजनैतिक संवाद और संचार के लिए मानक बन चुकी थी. उनके व्यक्तित्व की बुनावट के ताने-बाने देश और लोक के सरोकारों से … Read More
‘बनारसी’ एक ख़ास तरह की जीवन-दृष्टि और स्वभाव को इंगित करने वाला ‘विशेषण’ भी बन चुका है जो भारत की बहुलता और जटिलता को रूपायित करता है. यहाँ बहुलता के … Read More
इस देश-गान में शस्य-श्यामल, सुखद, और वरद भारत माता की वन्दना की गई है । इस तरह गुलामी के दौर में देश में सब के प्राण बसते थे और देश … Read More
Hindi Language: अक्सर भाषा को संचार और अभिव्यक्ति के एक प्रतीकात्मक माध्यम के रूप ग्रहण किया जाता है. यह स्वाभाविक भी है. हम अपने विचार, सुख-दुख के भाव और दृष्टिकोण … Read More