Varanasi Garbage

Waste Management: वाराणसी में कचरा प्रबंधन पर कार्यशाला, बल्क वेस्ट जनरेटरों का पंजीकरण अनिवार्य

​Waste Management: कचरा प्रबंधन के लिए बल्क वेस्ट जनरेटरों का ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य, नगर निगम ने शुरू की प्रक्रिया, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई

  • ​सिगरा स्टेडियम में आयोजित कार्यशाला में शैक्षणिक संस्थानों व होटलों के 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया भाग

रिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी, 29 सितम्बर:
प्रधानमंत्री और काशी के सांसद नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में कचरा प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 (जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हैं) के अनुपालन में शहर के सभी बल्क वेस्ट जनरेटर (बीडब्ल्यूजी) का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। नगर निगम ने इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से प्रारंभ कर दी है।

​नगर निगम द्वारा सिगरा स्थित डॉ. सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स स्टेडियम के सभागार में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 के अंतर्गत वाराणसी बृहद कचरा उत्पादकों (बीडब्ल्यूजी) के अभिमुखीकरण हेतु प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित हुआ. कार्यशाला के मुख्य अतिथि नगर निगम के उपसभापति नरसिंह दास ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2014 में काशी के ऐतिहासिक अस्सी घाट से फावड़ा चलाकर स्वच्छ भारत अभियान शुरु किया था. ऐसे में काशी को स्वच्छ बनाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शहर की सफाई सिर्फ नगर निगम या सरकार की भूमिका से संभव नहीं है, इसमें नागरिकों और संस्थानों को भी अपना कर्तव्य निभाना होगा।

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अवसर पर विशेषज्ञों में इम्पैनल्ड कंसल्टेंट आरसीयूईएस की डॉ. कल्पना अरोड़ा, यूपीपीसीबी के रीजनल ऑफिसर रोहित सिंह, तथा जीआईजेड इंडिया की जलवायु परिवर्तन एवं सर्कुलर इकोनॉमी सलाहकार एकता गुप्ता ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से कचरा प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन अंजना झा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा ने किया।

कार्यशाला में पार्षद मुन्ना सरोज, सीमा वर्मा, कनकलता, पार्षद प्रतिनिधि पुन्नू लाल बिंद, रविंद्र सिंह, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी संदीप भारद्वाज, जोनल स्वच्छता अधिकारी क्षितिज मिश्रा व राजीव कुमार चौधरी उपस्थित रहे। कार्यशाला में शैक्षणिक संस्थानों, होटलों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के करीब 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

​बल्क वेस्ट जनरेटर के मानक
यदि कोई भी संस्थान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, परिसर या भवन निम्नलिखित तीन में से किसी एक मानक को पूरा करता है, तो उसे बल्क वेस्ट जनरेटर माना जाएगा:
​फ्लोर एरिया: 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक।
​जल की खपत: 40,000 लीटर प्रति दिन या उससे अधिक।
​कचरा उत्पादन: 100 किलोग्राम प्रति दिन या उससे अधिक ठोस अपशिष्ट का उत्पादन। इसके दायरे में बड़े आवासीय परिसर (आरडब्ल्यूए), होटल, रेस्तरां, अस्पताल, मॉल, बाजार, बैंक्वेट हॉल, शैक्षणिक संस्थान, सरकारी व निजी कार्यालय आते हैं।

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​ऑनलाइन पंजीकरण और मुख्य नियम
सभी पात्र बल्क वेस्ट जनरेटरों को केंद्रीयकृत ऑनलाइन पोर्टल swm.cpcb.gov.in/register पर चार सरल चरणों में अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पंजीकरण के बाद प्रतिष्ठानों को कचरा पृथक्करण, प्रसंस्करण और निस्तारण का विवरण दर्ज करना होगा। ​स्रोत पर ही कचरे को चार श्रेणियों (गीला, सूखा, सैनिटरी और स्पेशल केयर/हानिकारक) में अलग-अलग करना अनिवार्य है। बड़े परिसरों को गीले कचरे का निपटान अपने परिसर में ही कम्पोस्टिंग या बायो-मिथेनेशन के जरिए करना होगा। सूखे कचरे को केवल अधिकृत रीसाइक्लर को सौंपा जा सकता है। सड़क या खुले भूखंड में कचरा फेंकने अथवा जलाने पर पूरी तरह रोक है और उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई होगी।