Micron Sanand Cleanroom बना विश्व के सबसे बड़े क्लीनरूम में शामिल
Micron Sanand Cleanroom: सेमीकंडक्टर की चिप बनाने के लिए अत्यंत स्वच्छ रूम जरूरी, साणंद में माइक्रोन का क्लीनरूम विश्व के सबसे बड़े क्लीनरूम की सूची में शामिल
- Micron Sanand Cleanroom: साणंद प्लांट के प्रथम फेज में निर्मित क्लीनरूम का क्षेत्र 5 लाख वर्ग फीट, एफिल टावर से साढ़े तीन गुना अधिक स्टील का उपयोग : संजय मेहरोत्रा, अध्यक्ष एवं सीईओ, माइक्रोन टेक्नोलॉजी
- ऑपरेशन थियेटर से भी अधिक स्वच्छ होता है क्लीनरूम, एक छोटे कण या तापमान में 1 डिग्री के परिवर्तन से भी मशीन का कार्य ठप हो सकता है
गांधीनगर, 27 फरवरी: Micron Sanand Cleanroom: सेमीकंडक्टर चिप की उत्पादन प्रक्रिया में क्लीनरूम महत्वपूर्ण होता है। चिप के उत्पादन में वातावरण का पूर्णतः स्वच्छ होना जरूरी है, कारण कि हवा में मौजूद अत्यंत छोटे कण भी चिप में घुसकर नुकसान पहुँचा सकते हैं। चिकित्सा उपकरणों, दवाइयों तथा सेमीकंडक्टर के उत्पादों के लिए क्लीनरूम बनाया जाता है। साणंद में माइक्रोन कंपनी द्वारा बनाया गया क्लीनरूम विश्व के सबसे बड़े क्लीनरूम की सूची में शामिल हो गया है।
माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron Sanand Cleanroom) के अध्यक्ष एवं सीईओ संजय मेहरोत्रा के अनुसार माइक्रोन के साणंद प्लांट में प्रथम फेज में 5 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में क्लीनरूम का निर्माण किया गया है, जिसमें एफिल टावर से साढ़े तीन गुना अधिक लोहे तथा ओलंपिक आकार के 100 स्विमिंग पूल जितने कंक्रीट का उपयोग किया गया है।
मोदी सरकार ने मजबूत सहयोग दिया, निवेश के लिए प्रोत्साहित किया : संजय मेहरोत्रा
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने हमें मजबूत सहयोग दिया है और कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने वाली नीतियाँ बनाई हैं। साणंद का प्रोजेक्ट भारत में एक अग्रणी प्रोजेक्ट है तथा केन्द्र व गुजरात सरकार के साथ भागीदारी में कार्य करने का हमें गर्व है।
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क्लीनरूम की हवा कई बार ऑपरेशन थियेटर से भी अधिक स्वच्छ
Micron Sanand Cleanroom: माइक्रोन टीम द्वारा बताया गया कि साणंद के माइक्रोन प्लांट में अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार विशाल क्लीनरूम बनाया गया है। इस क्लीनरूम में मौजूद हवा कई बार ऑपरेशन थियेटर से भी अधिक स्वच्छ होती है। यहाँ एक बाल भी चिप को नुकसान पहुँचा सकता है। इस कारण उसे अत्यंत स्वच्छ रखना जरूरी है।

क्लीनरूम (Micron Sanand Cleanroom) को स्वच्छ रखने के लिए फिल्टर्ड हवा को ऊपर से नीचे (वर्टिकली) समान मात्रा में भेजा जाता है। यह हवा अस्त-व्यस्त नहीं होती है और एक समान लय में प्रवाहित होती है। क्लीनरूम का नीचे वाला फ्लोर भी जमीन की सतह से थोड़ा ऊँचाई पर बनाया हुआ होता है, जिसके नीचे हवा गुजरती है और कूलिंग, पावर तथा डेटा का कार्य चलता रहता है।
क्लीनरूम में तापमान में लगभग एक डिग्री का फर्क पड़े, तो भी मशीन के कार्य में वह विक्षेप पहुँचा सकता है। इसलिए तापमान को निरंतर अत्यंत सूक्ष्म स्तर तक नियंत्रित किया जाता है, कारण कि मेमोरी टेस्टर मशीनों से तापमान में बड़े पैमाने पर वृद्धि होती है। एक सूक्ष्म कण भी अगर चिप में प्रवेश कर जाए, तो वर्षों बाद भी वह प्रोडक्ट में नुकसान पैदा कर सकता है। यहाँ पावर, कूलिंग तथा हवा के लिए पर्याप्त बैकअप प्रणाली रखी गई है, जिससे किसी एक सिस्टम में कोई विक्षेप हो, तो कामकाज पूर्ववत रखा जा सके।
माइक्रोन (Micron Sanand Cleanroom) के वैश्विक गोल्ड स्टैंडर्ड के अनुसार इस क्लीनरूम को भारत में डिजाइन किया गया है। इस प्लांट के शुभारंभ से भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत दावेदारी दर्ज कराएगा। कंपनी 2019 से भारत में कार्यरत है। बेंगलुरु तथा हैदराबाद में कंपनी के रिसर्च एवं डेवलपमेंट केन्द्र सक्रिय हैं। हाल में माइक्रोन भारत में लगभग 24,000 लोगों को रोजगार देता है। भारत में कार्यरत कर्मचारी कंपनी के वैश्विक इनोवेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कंपनी के कुछ सर्वाधिक अत्याधुनिक डीआरएएम मेमोरी उत्पाद अमेरिका की टीमों के सहयोग से भारत में डिजाइन किए गए हैं।
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