Gender in Flux: BHU में 30 अक्टूबर से अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘जेंडर इन फ्लक्स’ का शुभारंभ
Gender in Flux: समाजशास्त्र विभाग के तत्वावधान में जेंडर के भारतीय एवं विऔपनिवेशिक दृष्टिकोणों पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में कई ख्याति प्राप्त समाजशास्त्री करेगें शिरकत
काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित वैदिक विज्ञान केंद्र में आयोजित तीन दिवसीय संगोष्ठी के मुख्य अतिथि होंगे प्रो कपिल कपूर तथा मुख्य वक्ता होंगी निवेदिता भिंडे
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📲 WhatsApp पर शेयर करेंरिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी, 28 अक्टूबर: Gender in Flux: काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ 30 अक्टूबर को होगी. वैदिक विज्ञान केंद्र में आयोजित इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी का विषय “जेंडर इन फ्लक्स: रीथिंकिंग इवोल्यूशन, इंटरसेक्शनैलिटी एंड न्यू होराइज़न्स इन इंडिया” है. उक्त जानकारी अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की संयोजिका समाज शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. श्वेता प्रसाद ने एक पत्रकार वार्ता में दी.
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संगोष्ठी के उद्देश्य के बारे में ख्यात समाजशास्त्री प्रो श्वेता ने बताया कि, संगोष्ठी में छह देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता और 150 से अधिक शोध-पत्रों की प्रस्तुति की जायेगी. यह संगोष्ठी जेंडर (Gender in Flux) के भारतीय एवं विऔपनिवेशिक दृष्टिकोणों से पुनर्परीक्षण तथा समाजशास्त्रीय शोध, शिक्षण, नीति और सामाजिक सहभागिता के लिए नवीन बौद्धिक संसाधनों के सृजन का महत्वपूर्ण अकादमिक मंच बनेगी. प्रो श्वेता ने संगोष्ठी के उद्देश्य के बारे में बताया कि, जेंडर के समाजशास्त्र में भारतीय संदर्भों पर आधारित दृष्टिकोणों को सुदृढ़ करना तथा समकालीन जेंडर अध्ययन की बौद्धिक आधारभूमि का आलोचनात्मक परीक्षण करने के लिए विद्वानों को एक साझा मंच प्रदान करना है।
समाजशास्त्र विभाग के गौरवशाली परंपरा के ख्याति प्राप्त समाजशास्त्री प्रो एस के श्रीवास्तव, प्रो हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव, प्रो सत्येंद्र त्रिपाठी, प्रो जी एस नेपाली, प्रो जेटली, प्रो आनंद कुमार, प्रो मंजीत चतुर्वेदी, प्रो अरविन्द कुमार जोशी आदि के कीर्ति की, वर्तमान ध्वज वाहक, प्रो श्वेता प्रसाद ने आगे बताया कि, समकालीन सामाजिक विज्ञानों में जेंडर एक केंद्रीय अध्ययन-विषय के रूप में उभरा है। सामाजिक संरचनाओं, सांस्कृतिक पहचानों, राजनीतिक प्रक्रियाओं और असमानताओं में हो रहे परिवर्तनों ने इसके अध्ययन को और अधिक प्रासंगिक बनाया है।
तथापि, जेंडर को समझने के लिए प्रयुक्त अनेक सैद्धांतिक ढाँचे अब भी मुख्यतः यूरो-अमेरिकी बौद्धिक परंपराओं से प्रभावित हैं। यह संगोष्ठी भारतीय संदर्भ में इन ढाँचों की उपयोगिता और सीमाओं का आलोचनात्मक परीक्षण करते हुए भारत के विविध ऐतिहासिक अनुभवों, सामाजिक यथार्थ, सांस्कृतिक परंपराओं और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर आधारित समाजशास्त्रीय दृष्टिकोणों की संभावनाओं को तलाशेगी।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में निवेदिता भिड़े मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत करेंगी तथा प्रो. कपिल कपूर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. अजीत चतुर्वेदी, कुलपति, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, करेंगे। इस अवसर पर प्रो. ए. के. उपाध्याय, संकायाध्यक्ष, सामाजिक विज्ञान संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, भी उपस्थित रहेंगे.
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संगोष्ठी के समापन सत्र में प्रो. बंदना पुरकायस्थ उपाध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय समाजशास्त्रीय संघ एवं कनेक्टिकट विश्वविद्यालय, समापन व्याख्यान देंगी। प्रो. बद्रीनारायण, कुलपति, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS), मुंबई, विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। सत्र की अध्यक्षता प्रो. डी. आर. साहू, अध्यक्ष, भारतीय समाजशास्त्रीय परिषद करेंगे. पत्रकारवार्ता को प्रो. श्वेता प्रसाद के साथ आयोजन सचिव डॉ. विमल लहरी ने भी सम्बोधित किया।

