Training Programme: BHU के प्रबंध संस्थान में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
Training Programme: सेंट्रल बैंक ऑफ़ इण्डिया के अधिकारियों के लिये आयोजित सेवा निवृत्ति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम में, देश भर से आये वरिष्ठ अधिकारी गण कर रहे हैँ शिरकत
- Training Programme: प्रबंध संस्थान के निदेशक प्रो आशीष बाजपेई ने इस अभिनव प्रशिक्षण कार्यक्रम पर डाला प्रकाश
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📲 WhatsApp पर शेयर करेंरिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी, 22 सितम्बर: Training Programme: इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईएम), बीएचयू में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों के लिए सेवानिवृत्ति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ. पांच दिनों तक चलने वाले इस अभिनव प्रशिक्षण कार्यक्रम की थीम है…“जीवन की एक नई राह के लिए स्वयं को देखने की एक नई दृष्टि आवश्यक होती है।”
इसी विचार के साथ आई एम काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों के लिए पांच दिवसीय सेवानिवृत्ति पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश भर से आए वरिष्ठ अधिकारी, जनरल मैनेजर, चीफ जनरल मैनेजर, डिप्टी जनरल मैनेजर, असिस्टेंट जनरल मैनेजर तथा चीफ इंटरनल ऑडिटर आदि इस कार्यक्रम में शिरकत कर रहे हैँ.
उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम अपने स्वरूप और गहराई में आईएम बीएचयू द्वारा अब तक आयोजित एक अपनी तरह का अनूठा और अभिनव कार्यक्रम है। उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि संस्थान के निदेशक प्रो. आशीष बाजपेई ने काशी के आध्यात्मिक महत्व तथा कार्यक्रम को सोमवार के दिन आरंभ होने की विशेषता और महादेव के आशीर्वाद को इस विशेष सत्र के साथ जोड़ते हुए इसकी सार्थकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने सेवानिवृत्ति नियोजन, उद्देश्यपूर्ण सहभागिता, वित्तीय तैयारी, स्वास्थ्य एवं कल्याण तथा व्यक्तिगत संतुष्टि के महत्व पर विशेष बल दिया।
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संकाय प्रमुख प्रो. सुजीत कुमार दुबे ने कहा कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा इस प्रकार का सेवानिवृत्ति पूर्व ईडीपी सत्र संचालित करने हेतु आईएम बीएचयू पर विश्वास जताना संस्थान के लिए अपने आप में एक दुर्लभ एवं गौरवपूर्ण अवसर है, जो संस्थान की अकादमिक क्षमता में विश्वास को दर्शाता है। प्रो. प्रेम शंकर त्रिपाठी ने प्रतिभागियों को जीवन के विभिन्न चरणों से होते हुए सेवानिवृत्ति तक की यात्रा को समझाया, तथा उन्हें प्रेरित किया कि इस संक्रमण को अंत नहीं, बल्कि आगे की यात्रा के सुनियोजित नियोजन के एक चरण के रूप में देखें।
संकाय प्रमुख प्रो. दुबे ने एक रोचक “जॉय ऑडिट” अभ्यास संचालित किया, जिसमें प्रतिभागियों को अपने व्यावसायिक जीवन से परे आनंद एवं संतुष्टि के वास्तविक स्रोतों की पहचान करने हेतु मार्गदर्शन दिया गया. प्रो. आशुतोष मोहन ने इस बात पर चर्चा की कि, सेवानिवृत्ति के बाद भी व्यक्ति अपने अनुभव और ज्ञान के माध्यम से समाज और संस्थान पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे स्वयं को केवल अपने अनुभवों तक सीमित न रखें, बल्कि अगली पीढ़ी के नेतृत्व को तैयार करने वाले मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत की भूमिका भी निभाएँ।

