105th Convocation of BHU: बीएचयू के 105 वें दीक्षांत समारोह में प्रदान की गई 13,650 उपाधियां
105th Convocation of BHU: नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत ने दिया दीक्षांत भाषण, विद्यार्थियों को ‘नए युग’ में परिवर्तन लाने का किया आह्वान
- 105th Convocation of BHU: बीएचयू ने शिक्षा, शोध और राष्ट्रनिर्माण की अपनी गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाया: कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी
रिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी, 12 दिसम्बर: 105th Convocation of BHU: “आने वाले वर्षों में आपके निर्णय न केवल आपकी व्यक्तिगत यात्रा को आकार देंगे, बल्कि राष्ट्र की दिशा भी तय करेंगे,” काशी हिंदू विश्वविद्यालय के 105वें दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में डॉ. वी. के. सारस्वत ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया। नीति आयोग, भारत सरकार, के सदस्य और दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में अपने प्रेरक और विचारोत्तेजक संबोधन में उन्होंने उपाधि प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों से ‘नए युग’ में परिवर्तनकारी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विनम्रता, सत्यनिष्ठा, संवेदनशीलता, अनुशासन, आजीवन सीखने की प्रवृत्ति और सहयोग कुछ ऐसे गुण है जो विद्यार्थियों के नेतृत्व को आकार देंगे। डॉ. सारस्वत ने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि ये गुण काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूज्य संस्थापक, महामना के जीवन में निरंतर परिलक्षित होते हैं।
स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्रनिर्माण तथा देश की प्रगति में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विद्वानों, वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के योगदान का उल्लेख करते हुए पूर्व डीआरडीओ सचिव ने कहा कि बीएचयू की यही महान विरासत आज उपाधि प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों की सफलता की आधारशिला है। डॉ. सारस्वत ने कहा कि वे विद्यार्थियों में ऐसे अभियंताओं को देखते हैं जो कल के बुनियादी ढांचे का निर्माण करेंगे, ऐसे प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ जो नवाचार का लोकतंत्रीकरण करेंगे, और ऐसे व्यक्तित्व जो जटिलताओं का प्रबंधन बुद्धिमानी से करेंगे।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, “आप भारत की शैक्षणिक व्यवस्था के श्रेष्ठतम परिणाम का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनके पास कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर सतत इंजीनियरिंग, प्रबंधन विज्ञान से लेकर अनुप्रयुक्त अनुसंधान तक का ज्ञान है।” उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उनका स्नातक होना सीखने का अंत नहीं बल्कि जीवन के एक नए चरण की शुरुआत है। उन्होंने कहा, “यहाँ बीएचयू में आपकी यात्रा ने आपको बौद्धिक उपकरणों और नैतिक मूल्यों से लैस किया है, जो वास्तविक दुनिया में आपका मार्गदर्शन करेंगे और जिनका महत्व आप समय के साथ और गहराई से समझेंगे।
आने वाले वर्ष केवल शैक्षणिक तैयारी ही नहीं, बल्कि ज्ञान को सार्थक क्रिया में बदलने की क्षमता भी माँगेंगे। चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीकी कौशल, डिज़ाइन थिंकिंग की कार्यप्रणाली और सामाजिक आवश्यकताओं की समझ- इन सबका समन्वय आवश्यक होगा।”
तेजी से बदलती दुनिया में नवाचार के महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. सारस्वत ने कहा कि नवाचार केवल तकनीक नहीं, बल्कि दुनिया को अलग नज़रिये से देखने का नाम है। डिज़ाइन थिंकिंग के संदर्भ में उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे इसे अपनी कक्षाओं में शामिल करें, ताकि विद्यार्थी इस दृष्टिकोण का उपयोग समाज और देश के व्यापक हित में कर सकें. डॉ. सारस्वत ने स्नातक विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति सजग रहें और उन ज्ञान परंपराओं से शक्ति लें, जिन्होंने हमारी सभ्यता की यात्रा को दिशा दी है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए बीएचयू से बेहतर स्थान कोई नहीं हो सकता, क्योंकि महामना ने इस महान विश्वविद्यालय में एक सुदृढ़ सांस्कृतिक आधार स्थापित किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, “आपका कार्य परंपरा और आधुनिकता के बीच चयन करना नहीं, बल्कि दोनों में सामंजस्य स्थापित करना है।”
उपाधि प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि वर्ष 2024–25 विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण प्रगति और उपलब्धियों का रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के संस्थापक पूज्यनीय महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की दृष्टि से प्रेरित होकर, विश्वविद्यालय निरंतर अपनी गौरवशाली परंपरा—विद्वत्ता, अनुसंधान और राष्ट्र निर्माण में योगदान—को कायम रखे हुए है।
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विभिन्न क्षेत्रों में विश्वविद्यालय की प्रगति का विवरण प्रस्तुत करते हुए प्रो. चतुर्वेदी ने इस बात पर जोर दिया कि बीएचयू समाज पर सकारात्मक प्रभाव रखने वाले नवाचार और अनुसंधान पर निरंतर ज़ोर दे रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024–25 में 115 विशिष्ट संकाय सदस्य विश्वविद्यालय से जुड़े, जो अपने साथ वैश्विक अनुभव, शैक्षणिक व अनुसंधान उत्कृष्टता, और शिक्षण के प्रति प्रतिबद्धता लेकर आए हैं। विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता 4,980 से अधिक शोध प्रकाशनों में परिलक्षित होती है, जिन्हें कुल मिलाकर एक लाख से अधिक उद्धरण प्राप्त हुए हैं, तथा विश्वविद्यालय का एच-इंडेक्स 268 है। इसके अतिरिक्त 33 नए पेटेंट दाखिल किए गए और 18 पेटेंट प्राप्त हुए, जो बीएचयू के मजबूत शोध और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाते हैं।
कुलपति जी ने कहा कि बीएचयू मानव मूल्यों और सामाजिक उत्थान के लिए कार्य करते हुए वैश्विक स्तर पर स्थापित होने के लिए प्रतिबद्ध है, और यह महामना की उस शिक्षा-दृष्टि के अनुरूप है जिसमें शिक्षा को राष्ट्रीय परिवर्तन की शक्ति माना गया है।
समारोह के दौरान मेधावी विद्यार्थियों को चांसलर मेडल, स्वर्गीय महाराजा विभूति नारायण पदक और बीएचयू मेडल प्रदान किए गए. मुख्य अतिथि डॉ. वी. के. सारस्वत, कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, कुलगुरू प्रो. संजय कुमार और कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को पदक और उपाधियाँ प्रदान कीं।
स्वागत भाषण देते हुए कुलगुरू प्रो. संजय कुमार ने कहा, “दीक्षांत वह क्षण है जहाँ स्वप्न और यथार्थ के बीच सेतु तैयार होता है।” प्रो. पतंजलि मिश्र द्वारा मंगलाचारण प्रस्तुत किया गया, संगीत एवं मंच कला संकाय के विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय कुलगीत का प्रस्तुतिकरण किया. अंत मे धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह ने दिया.
स्वतंत्रता भवन में मुख्य दीक्षांत समारोह के उपरांत, विभिन्न संस्थानों और संकायों के उपाधि वितरण कार्यक्रम आरंभ हुए। उपाधि वितरण समारोह 13 दिसंबर तक जारी रहेंगे। 2025 के दीक्षांत समारोह में कुल 13,650 उपाधियाँ प्रदान की जा रही हैं। इनमें 7,449 स्नातक उपाधियाँ, 5,484 स्नातकोत्तर उपाधियाँ, 712 पीएचडी उपाधियाँ, 4 एम.फिल उपाधियाँ और 1 डॉक्टर ऑफ साइंस उपाधि शामिल हैं, साथ ही कुल 556 मेडल विभिन्न संस्थानों और संकायों में प्रदान किए जा रहे हैं।


