IIT BHU

IIT BHU: आई आई टी बी एच यू मे महत्वपूर्ण कार्यशाला सम्पन्न

IIT BHU: कार्यशाला में सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु भारत की रणनीति पर विशेषज्ञों ने किया गहन मंथन

  • पूर्व निदेशक प्रो सिद्ध नाथ उपाध्याय ने दिया उद्घाटन व्याख्यान

रिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी, 19 मार्च:
IIT BHU: आई आई टी बी एच यू मे सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर आधारित एक उच्च-स्तरीय एकदिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया. कार्यशाला में देश के प्रमुख विशेषज्ञों, शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं ने भाग लेकर SDG जागरूकता तथा वर्ष 2030 तक भारत की प्रगति पर विचार-विमर्श किया। कार्यशाला का उद्घाटन प्रद्योगिकी संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो सिद्ध नाथ उपाध्याय ने किया.

कार्यशाला का संयुक्त आयोजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय), वाराणसी के सतत विकास केंद्र तथा नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज़, इंडिया (NASI) के वाराणसी चैप्टर द्वारा किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शोधकर्ताओं के बीच SDGs के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना था। प्रारम्भ में एसोसिएट डीन (अनुसंधान एवं विकास) प्रोफेसर आभा मिश्रा ने भारतीय परिप्रेक्ष्य में SDG जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया तथा अकादमिक संस्थानों की भूमिका को रेखांकित किया।

कार्यशाला को दो तकनीकी सत्रों में विभाजित किया गया, जिनमें विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ-साथ संवादात्मक चर्चाएं आयोजित की गईं, जिससे सैद्धांतिक अवधारणाओं को व्यावहारिक चुनौतियों से जोड़ा जा सके.

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प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. एस. एन. उपाध्याय ने उद्घाटन व्याख्यान देते हुए संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने SDGs की परस्पर संबद्धता पर प्रकाश डालते हुए बहु-हितधारक सहभागिता की आवश्यकता पर जोर दिया।इसके पश्चात प्रो. जितेन्द्र पांडेय ने विकास और पर्यावरणीय सीमाओं के बीच संतुलन पर अपने विचार रखे। उन्होंने सतत विकास के संदर्भ में आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की जटिलताओं को स्पष्ट किया।

सत्र का समापन प्रो. प्रभात कुमार सिंह के SDG 6 (स्वच्छ जल एवं स्वच्छता) पर व्याख्यान से हुआ, जिसमें उन्होंने भारत की जल सुरक्षा स्थिति का विश्लेषण करते हुए उपलब्धियों और चुनौतियों दोनों को रेखांकित किया। उन्होंने तकनीकी नवाचार और सुदृढ़ नीतिगत ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया। प्रत्येक व्याख्यान के पश्चात प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और स्थानीय स्तर की चुनौतियों पर चर्चा की।

नेटवर्किंग लंच के बाद आयोजित द्वितीय सत्र में क्षेत्र-विशिष्ट पहलों और विस्तार योग्य समाधानों पर चर्चा की गई।प्रो. देवेंद्र मोहन ने स्वच्छ जल और स्वच्छता के सार्वभौमिक लक्ष्य की प्राप्ति हेतु तकनीकी एवं नीतिगत पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपयुक्त तकनीक, सुदृढ़ अवसंरचना और प्रभावी शासन की महत्ता को रेखांकित किया। डॉ. पी. सी. अभिलाष ने संयुक्त राष्ट्र SDGs के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं पर चर्चा की, जिससे बड़े सरकारी कार्यक्रमों और जमीनी स्तर के प्रयासों के बीच समन्वय पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

सत्र का समापन डॉ. अभिषेक सुरेश धोबले के अपशिष्ट से संसाधन (Waste-to-Resource) प्रौद्योगिकियों पर प्रस्तुतीकरण से हुआ। उन्होंने परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के अंतर्गत कृषि अवशेष और नगरीय कचरे को ऊर्जा एवं उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला, जो जलवायु कार्रवाई, सतत शहरों और जिम्मेदार उपभोग जैसे अनेक SDGs को आगे बढ़ाने में सहायक हैं।

कार्यशाला का समापन इस सहमति के साथ हुआ कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अकादमिक संस्थानों, नीति-निर्माताओं और समुदायों के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक है, ताकि ज्ञान को ठोस कार्यों में परिवर्तित किया जा सके।

कार्यक्रम का समन्वयन प्रो. विकास कुमार दुबे, प्रोफेसर-इन-चार्ज, SDG सेंटर, IIT (BHU) तथा डॉ. पी. सी. अभिलाष, सचिव, NASI वाराणसी चैप्टर द्वारा किया गया।

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