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Singing Workshop: बी एच यू के संगीत एवं मंच कला संकाय मे गायन कार्यशाला

Singing Workshop: बनारस घराने की उपशास्त्रीय परंपरा पर दो दिवसीय कार्यशाला का हुआ शुभारम्भ

  • पं ओंकार नाथ ठाकुर प्रेक्षागृह मे आयोजित कार्यशाला मे, बनारस घराने की प्रतिष्ठित विदुषी कलाकार श्रीमती मीना मिश्रा ने दी भावपूर्ण प्रस्तुति

रिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी, 11 फरवरी:
Singing Workshop: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय द्वारा कोस्तुभ जयंती समारोह के अंतर्गत दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई. प्रथम दिवस का आयोजन पं. ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में संपन्न हुआ। इस कार्यशाला की विषय विशेषज्ञ बनारस घराने की प्रतिष्ठित विदुषी कलाकार श्रीमती मीना मिश्रा रहीं।

कार्यक्रम की संयोजक प्रो. संगीता पंडित, संकाय प्रमुख एवं विभागाध्यक्षा, गायन एवं संगीतशास्त्र विभाग, संगीत एवं मंच कला संकाय रहीं। आयोजन सचिव के रूप में डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य एवं डॉ. श्यामा कुमारी, गायन विभाग, ने कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय किया।

अपने सांगीतिक सत्र में मीना मिश्रा ने सर्वप्रथम बंदिश की ठुमरी — “पिया से संदेशा मोरा कहियो जाय, कागा रे जा रे जा रे” प्रस्तुत की। इसके उपरांत उन्होंने दादरा — “भरी सिर गागर छोड़ो मोरी बहियां” प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने जत ताल में निबद्ध ठुमरी — “अब ना बजाओ श्याम, व्याकुल भई बृजबाम” की प्रस्तुति देकर भाव, लय और रागात्मक सौंदर्य का प्रभावशाली समन्वय प्रस्तुत किया। उनकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति एवं बनारसी अंग की विशिष्टता ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

प्रस्तुति में हारमोनियम पर डॉ. विजय कपूर ने सधी हुई संगत दी तथा तबले पर पंकज राय ने उत्कृष्ट ताल – संयोजन के साथ कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। मुख्य कलाकार एवं संगतकारों के मध्य सुमधुर तालमेल ने प्रस्तुति को विशेष ऊँचाई प्रदान की।

अवसर पर डॉ. राम शंकर, डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडे, प्रो. रेवती सकलकर, डॉ. कुमार अंबरीश चंचल, प्रो. संगीता सिंह, प्रो. प्रेम किशोर मिश्र तथा पंडित कुबेरनाथ मिश्रा सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे. कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को उपशास्त्रीय गायन की विविध शैलियों से परिचित कराना तथा बनारस घराने की समृद्ध सांगीतिक परंपरा को सुदृढ़ करना है।

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