IIT BHU E-Bike: आई आई टी बी एच यू के नवोन्मेशी ई बाइक को मिला राष्ट्रीय पेटेंट
IIT BHU E-Bike: आईआईटी (बीएचयू) की प्रोफेसर डॉ कल्पना चौधरी एवं उनकी टीम द्वारा विकसित हाइड्रोजन-चालित ई-बाइक को मिला राष्ट्रीय पेटेंट
- शोध कर्ताओं की यह महत्वपूर्ण उपलब्धि, स्वच्छ एवं टिकाऊ परिवहन की दिशा मे एक मील का पत्थर होंगी साबित
रिपोर्ट: डॉ राम शंकर सिंह
वाराणसी, 30 जनवरी: IIT BHU E-Bike: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) के विद्युत अभियंत्रण विभाग की प्रोफेसर डॉ. कल्पना चौधरी एवं उनकी शोध टीम द्वारा विकसित नवोन्मेषी हाइड्रोजन-चालित ई-बाइक को “A Multi-Mode Electric Vehicle” शीर्षक से भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा आधिकारिक पेटेंट प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि स्वच्छ एवं टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
यह ई-बाइक तीन मोड में संचालित की जा सकती है –
- हाइड्रोजन ऊर्जा मोड
- बैटरी आधारित इलेक्ट्रिक मोड
- मैन्युअल पैडलिंग मोड
टीम ने एक पुरानी एवं बेकार पड़ी गैराज साइकिल को मात्र तीन महीनों में उच्च दक्षता वाली ई-बाइक में परिवर्तित किया। यह परियोजना न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि संसाधनों के पुनः उपयोग (री-साइक्लिंग) की उत्कृष्ट मिसाल भी प्रस्तुत करती है।
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500 वाट की हाइड्रोजन फ्यूल सेल से संचालित यह ई-बाइक बेहतर माइलेज प्रदान करती है। फ्यूल सेल को साइकिल के पीछे कैरियर पर आसानी से लगाया जा सकता है। फ्यूल सेल की लागत को छोड़कर, पूरी ई-बाइक तैयार करने में लगभग ₹5,000 का खर्च आता है, जिससे यह आम जनता के लिए भी सुलभ होगी।
इस उपलब्धि पर आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि डॉ. कल्पना चौधरी एवं उनकी टीम का यह नवाचार संस्थान की अनुसंधान संस्कृति और सामाजिक दायित्वों को दर्शाता है। हाइड्रोजन आधारित स्वच्छ ऊर्जा तकनीक भविष्य के परिवहन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। यह पेटेंट संस्थान के लिए गर्व का विषय है और हमारे शोधकर्ताओं के समर्पण का प्रमाण है।
डॉ. कल्पना चौधरी ने बताया कि यह शोध उनके एसईआरबी (SERB) द्वारा वित्तपोषित फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल परियोजना का परिणाम है। इस ई-बाइक में यांत्रिक एवं विद्युत अभियंत्रण तकनीकों का समन्वय कर तीन-तरफा इंटरकन्वर्टिबल प्रणाली विकसित की गई है। इसमें बीएलडीसी मोटर लगी है, जिसे 500 वाट की हाइड्रोजन फ्यूल सेल अथवा 24 वोल्ट की बैटरी से ऊर्जा मिलती है. इस परियोजना में शोधार्थी मितांशु मीणा, ऐश्वर्या और अथर्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कड़ी मेहनत और नवाचार के प्रति समर्पण से यह तकनीक साकार हो सकी।
यह हाइड्रोजन-चालित ई-बाइक न केवल कम लागत और उच्च दक्षता प्रदान करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक प्रभावी कदम है। यह उपलब्धि आईआईटी (बीएचयू) की समाजोपयोगी अनुसंधान प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है।


