कोविड 19 के दौरान खाने की कमी में स्वैच्छिक क्षेत्र की जवाबी कार्रवाई:आईआईएम-ए

  • 100 से अधिक संगठनों और व्यक्तियों का ये सर्वेक्षण, कोविड -19 लॉकडाउन के दौरान नागरिक समाज (civil society) द्वारा खाने की कमी से जूझने के लिए किए गए विभिन्न प्रयासों और उनके सामने आई चुनौतियों का वर्णन करता है। सर्वेक्षण में उन व्यक्तियों और
  • संगठनों की प्रतिक्रियाएं शामिल हैं जो देश के विभिन्न हिस्सों में खाने की कमी का सामना कर रहे लोगों को भोजन और अनाज प्रदान कर रहे हैं या कर रहे थे। इस तरह के प्रयासों की निरंतर आवश्यकता और मांग के बावजूद, सर्वेक्षण इस तथ्य की ओर इशारा करता है
  • कि उनमें से अधिकांश के पास यह कार्य जारी रखने के लिए संसाधन नहीं हैं। सर्वेक्षण के परिणाम देश भर में भूख राहत प्रयासों में अधिक सक्रिय सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता को भी सामने लाते हैं।


मुख्य निष्कर्ष:

  1. विभिन्न आकारों और क्षेत्रों के संगठनों और समूहों ने देश भर में भूख और भोजन की कमी की समस्या के समाधान के लिए विविध तरीकों से प्रयास शुरू किए हैं: नागरिक समाज संगठनों (CSO) और व्यक्तियों ने विभिन्न तरीकों से राहत के प्रयास किए हैं और जनता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जवाबी प्रतिक्रिया की है।
  2. कमी, खराब गुणवत्ता और पहुंच की कमी के मुद्दों के कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के बावजूद भी ये प्रयास आवश्यक हैं: जबकि 20% से भी कम संगठनों और समूहों ने कहा कि सेवारत लोगों में से कोई भी PDS का लाभ नहीं उठा पा रहा था था, लगभग आधे उत्तरदाताओं ने कहा कि केवल कुछ लोगों ने राशन प्राप्त किया है। यह PDS की बड़ी आबादी तक पहुंचने में सक्षम होने की क्षमता, लेकिन सुधार की ज़रूरत दोनों की ओर इशारा करता है।
  3. नागरिक समाज के प्रयासों की विशेषता समुदाय की भागीदारी है: परिणाम बताते हैं कि नागरिक समाज संगठनों (CSOs) ने समुदायों की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने, नए समाधान विकसित करने और उन क्षेत्रों में अपने विस्तार का विस्तार करने की कोशिश की है जो आमतौर पर कम सुलभ हैं। लगभग 91% उत्तरदाताओं ने बताया कि समुदाय किसी न किसी क्षमता में उनके प्रयासों में शामिल थे।
  4. नागरिक समाज संगठनों (CSO) की पहल सरकारों से लगभग कोई वित्तीय सहायता न मिलने के बावजूद संचालित है: अधिकांश उत्तरदाताओं सूचना दी कि सरकार और प्रशासन का समर्थन कर्फ्यू पास देने और भोजन की जरूरत वाले क्षेत्रों की

1 यह रिपोर्ट आईआईएम अहमदाबाद के शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा तैयार की गई है – प्रोफेसर अंकुर सरीन (संकाय सदस्य), बियांका शाह (रिसर्च एसोसिएट), ईशू गुप्ता (रिसर्च एसोसिएट), करन सिंघल (रिसर्च एसोसिएट), श्रद्धा उपाध्याय (रिसर्च एसोसिएट), और वैदेही परमेस्वरन (रिसर्च इंटर्न)। वे डाटा संग्रह में सहायता के लिए श्रिया सिंह (रिसर्च इंटर्न, आईआईएम अहमदाबाद) और शैलेश क्रिश्चियन (सहयोग ट्रस्ट) के आभारी हैं। वे खाद्य राहत पहलों से जुड़े 100 से अधिक व्यक्तियों का उनके समय और और इस अध्ययन को सूचित करने के लिए उनकी विशेषज्ञता के लिए धन्यवाद करना चाहते हैं। वे प्रोफ़ेसर रीतिका खेड़ा और संदीप सचदेवा के प्रति उनके मूल्यवान सुझावों के लिए कृतज्ञता प्रकट करना चाहते हैं। पहचान तक सीमित रहा है। संसाधन और कच्चे माल के रूप में सहायता नगण्य रही है। 4% से कम उत्तरदाताओं को वित्तीयसमर्थन मिला है।

  1. अपर्याप्त वित्तीय संसाधन इन संगठनों / व्यक्तियों के निरंतर राहत प्रयासों के लिए एक बाधा बने हुए हैं: 87% से अधिक उत्तरदाताओं ने दावा किया कि वित्तीय संसाधन उनकी चिंता का प्राथमिक स्रोत है और यह उन्हें संचालन निलंबित करने के लिए मजबूर कर सकता है। लगभग 36% ने सर्वेक्षण के समय वितरण गतिविधियों को रोका हुआ था।

प्रमुख सुझाव:

  1. ऐसे समय में जब घरेलू स्तर पर भोजन दुर्लभ है, लेकिन देश के स्तर पर नहीं, स्वतंत्र प्रयासों संसाधनों की कमी के प्रसंग में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का सार्वभौमीकरण ज़रूरी है।
  2. सरकार और नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) के बीच नीति निर्माण और जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय इन प्रयासों के कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। उदाहरण के लिए, हालांकि ग़ैर सरकारी संस्थाओं को को FCI गोदामों से अनाज खरीदने की अनुमति थी, लेकिन वास्तव में बहुत कम उत्तरदाता सरकारी प्रक्रियाओं और आवश्यकताओं और गुणवत्ता की चिंताओं के कारण इसका उपयोग करने में सक्षम रहे। इसी तरह, स्थानीय संगठन कमजोर समुदायों की उन सरकारी कार्यक्रमों, जो PDS धारकों से परे जाने के लिए बनाए गए हैं, के माध्यम से राशन तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं।
  3. स्थानीय सरकारों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे रचनात्मक तरीके से खाद्य पदार्थों को कन्टेनमेंट ज़ोन में ज़रूरतमंद घरोंतक पहुंचाने के बारे में सोचें, जहाँ खाद्य वितरण अभी भी चुनौती बना हुआ है। इसमें उन क्षेत्रों में माल और सेवाओं के नियमित वितरण में लगे लोगों को- जैसे डाक सेवाओं, बिजली बिल लेनेवालों, कोरियर- पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों
    शामिल करना उपयोगी है।
  4. ऐसे गैर-सरकारी संगठन जिनके पास विशेष रूप से कमजोर समुदायों के साथ काम करने का ट्रैक रिकॉर्ड है, जैसे कि यौनकर्मी,एकल महिला नेतृत्व वाले घर, वरिष्ठ नागरिक को सरकार द्वारा तुरंत सहायता प्रदान की जानी चाहिए। संगठनों को विशेष समुदाय के लिए सबसे उपयुक्त कार्यक्रमों को बनाने और कार्यान्वित करने की स्वायत्तता दी जानी चाहिए।